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कोच व मैदान के बिना कैसे तैयार होंगे खिलाड़ी

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खेकड़ा स्थित स्टेडियम - फोटो : BAGHPAT
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-हरियाणा, दिल्ली व पंजाब में अभ्यास करने जाते है खिलाड़ी, समय व पैसा होता है खर्च
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-जिले के कई खिलाड़ी ओलंपिक तक पहुंच चुके, अर्जुन अवार्डी भी कई खिलाड़ी, फिर भी नहीं मिल रही सुविधाएं
संवाद न्यूज एजेंसी
बागपत। खेल के क्षेत्र में बागपत की देश-विदेश में अलग पहचान है। जिले के खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खूब पदक जीते है। ओलंपिक तक जिले के खिलाड़ियों ने देश का प्रतिनिधित्व किया है। अच्छे कोच और मैदान के अभाव में जिले के खिलाड़ियों को दिल्ली, हरियाणा और पंजाब में अभ्यास करने जाना पड़ता है। खिलाड़ियों का कहना है कि अगर जिले में अच्छे मैदान और कोच नियुक्त किए जाए तो उन्हें अपने जिले में ही अभ्यास की सुविधा मिलेगी।
सरुरपुर की क्रिकेटर व अंडर-19 क्रिकेट प्रतियोगिता खेल चुकी शशि माथुर का कहना है कि जिले में खेल संसाधनों का अभाव है। अच्छे मैदान और कोच नहीं है। जिसके कारण खिलाडिय़ों को दूसरे जनपद और राज्यों में प्रैक्टिस करने के लिए विवश होना पड़ता है। वह आगरा में प्रैक्टिर कर रही है। गाधी गांव की ही एथलेटिक्स खिलाड़ी तान्या चौधरी का कहना है कि जिले में अच्छे कोच और मैदानों का अभाव है। खिलाड़ियों को प्रैक्टिस करने के लिए दूसरे राज्यों में जाना पड़ता है।
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इन खेलों के कोच नहीं
जिले में क्रिकेट, वॉलीवाल, कुश्ती, कबड्डी, बैडमिंटन, तीरंदाजी, शूटिंग, स्वीमिंग और बॉक्सिंग के कोच नही है। कोच के अभाव में जिले के खिलाड़ी दूसरे राज्यों में प्रैक्टिस करने के लिए मजबूर है।
छह अर्जुन और दो लक्ष्मण अवार्डी
जिले में छह अर्जुन अवार्डी, दो लक्ष्मण अवार्डी और दो रानी लक्ष्मीबाई अवार्डी खिलाड़ी है। वर्ष 1987 में जिले के मलकपुर गांव के पहलवान सुभाष तोमर को पहला अर्जुन अवार्ड मिला। 1999 में जोहड़ी के शूटर विवेक सिंह को, 2003 में मलकपुर के पहलवान शोकेंद्र तोमर, 2010 में मलकपुर के पहलवान राजीव तोमर, 2014 में दाहा के पहलवान सुनील राणा और 2018 में खेकड़ा के पैरा एथलीट अंकुर धामा ने अर्जुन अवार्ड मिल चुका है। कुश्ती में अंशु तोमर और तीरंदाजी में रितिका को रानी लक्ष्मीबाई अवार्ड ले चुकी है। मलकपुर के नितिन तोमर कबड्डी और खेड़की के दिव्यांग शूटर आकाश शूटिंग में लक्ष्मण अवार्ड जीत चुके है।
प्रदेश सरकार ने नहीं दिया कोई ध्यान
अर्जुन अवार्डी पहलवान शोकेंद्र तोमर का कहना है कि शासन और प्रशासन को जिले की प्रतिभाओं को निखारने के लिए जिले में अच्छे कोच और मैदान की व्यवस्था करनी चाहिए। रख-रखाव के अभाव में बड़ौत का करोड़ों रुपये से तैयार कराया गया स्टेडियम बदहाल है। प्रदेश सरकार ने साढ़े चार साल के कार्यकाल में खेल के विकास के लिए कोई कार्य नहीं किया है। जिले में अच्छे कोच और मैदानों की व्यवस्था होने पर जिले के खिलाड़ियों को अभ्यास के लिए दूसरे राज्यों में नहीं जाना पड़ेगा।
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जिले में एक मात्र एथलेटिक्स के कोच तैनात है। भारोत्तलन प्रशिक्षण की जिम्मेदारी वह स्वयं संभाल रही है। कोच के अभाव में खिलाड़ियों को अन्य खेलों का प्रशिक्षण नहीं दिया जा रहा है। कई बार शासन को कोच की नियुक्ति के लिए पत्र भेजा जा चुका है। - सरिता रानी जिला क्रीड़ाधिकारी।
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