मंगलवार को बुलाई गई बैठक
समाजसेवी पुष्पेंद्र कुमार, सोनू चौहान, रामकुमार धामा, मनोज धामा, गजेंद्र धामा, उमेश शर्मा, अनुज शर्मा आदि का कहना था कि यह देश की आजादी से जुड़ा ऐतिहासिक स्थल है। यदि यह बारिश से जर्जर हो भी गया था। तो केवल मरम्मत कराकर सुंदरीकरण कराया जाना चाहिए था। इसको जमींदोज करने वालों ने शहीदों को अपमान किया है। धर्म संघ के पुनीत शर्मा, अनुज शर्मा का कहना है कि धार्मिक तथ्यों के अनुसार किसी कुएं को पाटा नहीं जा सकता। इस प्रकार कुएं को पाटने का अर्थ खेकड़ा पर किसी आपदा का संकेत है। मंगलवार को फिर सर्वसमाज की बैठक बुलाई गई हैं।
बारिश से कुएं के किनारे पर गहरा गड्ढा बन गया था। इसकी मरम्मत कराकर इसके स्वरूप से छेड़छाड़ न करने के आदेश दिए गए थे। इसे किसने जमींदोज कराया है, इसकी जांच कराई जाएगी। राष्ट्रीय संपत्ति गौरव स्थल सुरक्षा कानून के तहत मुकदमा दर्ज कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
- अजय कुमार, एसडीएम।
मौके पर पहुंचकर नगरवासियों से मामले की जानकारी ली गई। बुधवार से एतिहासिक स्थल गांधी प्याऊ का पूरे क्षेत्रफल में दोबारा निर्माण शुरू कराया जाएगा।
- अनिल पंडित, अधिशासी अधिकारी, नगर पालिका।
नमक आंदोलन में महात्मा गांधी भी यहां आए थे
मोहल्ला अहिरान निवासी बुजुर्ग तिलकराम वर्मा बताते है कि गांधी प्याऊ का निर्माण करीब 300 वर्ष पूर्व बंजारों ने कराया था। बंजारे जहां भी डेरा डालते थे, वहीं पानी के लिए कुआं बना लेते थे। बाद में आजादी की लड़ाई की योजना भी इसी कुएं और प्याऊ पर बनती थी। नमक आंदोलन के दौरान महात्मा गांधी भी यहां आए थे। खेकड़ा में करीब सौ वर्ष से रामलीला भी इसी स्थान पर होती आ रही है।
खेकड़ा के बाजार मे गांधी प्याऊ पर मिटटी डालकर पाटा गया 1857 की क्रान्ति का एतिहासिक कुआ- फोटो : KAHKRA