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बागपत: जमींदोज कर दी जंग-ए-आजादी की क्रांति की धरोहर गांधी प्याऊ, सोशल मीडिया पर छाया मामला

Tue, 07 Sep 2021 11:53 PM IST
मेरठ ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बागपत

सार

आरोप है कि सोमवार को कुछ व्यापारियों ने खुद ही फैसला लेते इस पूरे कुएं को ही जमींदोज करा दिया। सूचना मिलते ही समाजसेवियों की भीड़ मौके पर पहुंची, जिन्हें देख काम कर रहे मिस्त्री और मजदूर भाग गए। वहीं पूरा मामला सोशल मीडिया पर छाया हुआ है।
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खेकड़ा के बाजार मे स्थित गांधी प्याऊ का पाटने से पूर्व का फोटो - फोटो : KAHKRA
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विस्तार
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उत्तर प्रदेश के खेकड़ा नगर के बाजार में स्थित 1857 की क्रांति की धरोहर गांधी प्याऊ के कुएं को जमींदोज कर दिया गया। आरोप क्षेत्रीय व्यापारियों पर लगा है, जिनका कहना है कि उन्होंने प्रशासन के कहने पर ऐतिहासिक कुएं को मिट्टी से पटवाया है। सूचना पर एकत्र हुए समाजसेवियों ने जमकर हंगामा किया। ऐतिहासिक स्थल को यथावत पूरे क्षेत्रफल में दोबारा बनवाने और दोषियों को जेल भिजवाने की मांग की। हंगामा देख कार्य कर रहे मिस्त्री और मजदूर भाग खड़े हुए। उधर, एसडीएम ने कहा कि मामला गंभीर है, जांच कराकर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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खेकड़ा के बाजार में गांधी प्याऊ स्थल का प्राचीन कुआं 1857 की क्रांति की धरोहर था। नगर क्षेत्र के क्रांतिकारी यहां पर एकत्र हुआ करते थे और अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ जंग की योजना बनाते थे। देश की आजादी के बाद से देश प्रेमियों के लिए यह कुआं पूजनीय बना हुआ था। 15 अगस्त और 26 जनवरी को यहां राष्ट्रीय ध्वज भी फहराया जाता हैं।

कुछ दिन पूर्व हुई बारिश में इस कुएं के पास की जमीन करीब 10 फीट जमीन धंस गई थी। एसडीएम अजय कुमार और सीओ युवराज सिंह भी मौके पर पहुंचे थे और व्यापारियों को सतर्क रहने की सलाह दी थी। एसडीएम ने कुएं से जुडे़ गौरवशाली इतिहास को देखते हुए उसके किनारे पर बने गड्ढे को मिट्टी से भरवाकर मरम्मत कराने के निर्देश दिए थे।
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आरोप है कि सोमवार को कुछ व्यापारियों ने खुद ही फैसला लेते इस पूरे कुएं को ही जमींदोज करा दिया। सूचना मिलते ही समाजसेवियों की भीड़ मौके पर पहुंची, जिन्हें देख काम कर रहे मिस्त्री और मजदूर भाग गए। समाजसेवियों ने जमकर हंगामा किया। उन्होंने कुंए का अपने पूरे क्षेत्रफल में दोबारा निर्माण कराने और दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जेल भेजने की मांग की।
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मंगलवार को बुलाई गई बैठक
समाजसेवी पुष्पेंद्र कुमार, सोनू चौहान, रामकुमार धामा, मनोज धामा, गजेंद्र धामा, उमेश शर्मा, अनुज शर्मा आदि का कहना था कि यह देश की आजादी से जुड़ा ऐतिहासिक स्थल है। यदि यह बारिश से जर्जर हो भी गया था। तो केवल मरम्मत कराकर सुंदरीकरण कराया जाना चाहिए था। इसको जमींदोज करने वालों ने शहीदों को अपमान किया है। धर्म संघ के पुनीत शर्मा, अनुज शर्मा का कहना है कि धार्मिक तथ्यों के अनुसार किसी कुएं को पाटा नहीं जा सकता। इस प्रकार कुएं को पाटने का अर्थ खेकड़ा पर किसी आपदा का संकेत है। मंगलवार को फिर सर्वसमाज की बैठक बुलाई गई हैं।

बारिश से कुएं के किनारे पर गहरा गड्ढा बन गया था। इसकी मरम्मत कराकर इसके स्वरूप से छेड़छाड़ न करने के आदेश दिए गए थे। इसे किसने जमींदोज कराया है, इसकी जांच कराई जाएगी। राष्ट्रीय संपत्ति गौरव स्थल सुरक्षा कानून के तहत मुकदमा दर्ज कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। - अजय कुमार, एसडीएम।

मौके पर पहुंचकर नगरवासियों से मामले की जानकारी ली गई। बुधवार से एतिहासिक स्थल गांधी प्याऊ का पूरे क्षेत्रफल में दोबारा निर्माण शुरू कराया जाएगा। - अनिल पंडित, अधिशासी अधिकारी, नगर पालिका।

नमक आंदोलन में महात्मा गांधी भी यहां आए थे
मोहल्ला अहिरान निवासी बुजुर्ग तिलकराम वर्मा बताते है कि गांधी प्याऊ का निर्माण करीब 300 वर्ष पूर्व बंजारों ने कराया था। बंजारे जहां भी डेरा डालते थे, वहीं पानी के लिए कुआं बना लेते थे। बाद में आजादी की लड़ाई की योजना भी इसी कुएं और प्याऊ पर बनती थी। नमक आंदोलन के दौरान महात्मा गांधी भी यहां आए थे। खेकड़ा में करीब सौ वर्ष से रामलीला भी इसी स्थान पर होती आ रही है।
खेकड़ा के बाजार मे गांधी प्याऊ पर मिटटी डालकर पाटा गया 1857 की क्रान्ति का एतिहासिक कुआ- फोटो : KAHKRA
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