संवाद न्यूज एजेंसी
बागपत। कोरोना की दूसरी लहर में ऑक्सीजन का लेवल कम हो रहा है। उपचार के दौरान दी जाने वाली ऑक्सीजन ब्लैक फंगस का कारण बन रही है। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि ऑक्सीजन का अधिक प्रयोग करने से फेफड़ों में फंगस जमने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं।
कोरोना महामारी की दूसरी लहर में ब्लैक फंगस के मरीज भी मिल रहे हैं। जिले में मई माह में 4466 लोगों में कोरोना संक्रमण की पुष्टि हुई। 71 लोगों की संक्रमण से मौत हो चुकी है। जिले में अब तक ब्लैक फंगस के आठ मरीज मिल चुके हैं, इनमें से चार मरीज ठीक हो गए हैं। चिकित्सकों का कहना है लंबे समय तक ऑक्सीजन लगाने से मरीज के फेफड़ों में फंगस जम जाता है। मास्क किट की समय पर सफाई न होने पर फंगस बढ़ने की आशंका अधिक रहती है।
सफाई का रखना पड़ता है पूरा ध्यान
चिकित्सकों के मुताबिक अस्पतालों में एक मरीज पर एक मास्क किट और ट्यूब का प्रयोग किया जाता है। सिलिंडर में लगी ह्मयूनिटी फायर की समय-समय पर सफाई कराई जाती है और मास्क-किट व ट्यूब को बदला जाता है। एक बार प्रयोग होने के बाद मास्क किट व टयूब को नष्ट कर दिया जाता है। संक्रमितों के उपचार के दौरान अस्पतालों में सफाई का विशेष ध्यान रखा जाता है। समय-समय पर मरीजों की बेड शीट बदलवाई जाती है। दिन में कम से कम दो बार चिकित्सक विजिट करते है। सफाई के अभाव में भी फंगस की आशंका बढ़ जाती है।
औद्योगिक इस्तेमाल के सिलेंडरों से हो सकता है फंगस
- पिछले दिनों ऑक्सीजन की काफी किल्लत हो गई थी। अस्पतालों में ऑक्सीजन न मिलने पर कोरोना संक्रमित मरीजों के परिजनों ने औद्योगिक इकाईयों से भी सिलिंडरों का इंतजाम किया। इन सिलिंडरों में रिफीलिंग करते समय सफाई का कितना ध्यान रखा जाता है, यह कहा नहीं जा सकता। चिकित्सकों के अनुसार ब्लैक फंगस के अधिक मामले सामने की एक वजह यह भी हो सकती है।
वर्जन - लंबे समय तक ऑक्सीजन का प्रयोग करने से मरीज के फेफड़ों में फंगस जम जाता है। मेडिकल इस्तेमाल के सिलिंडर अलग होते हैं। उनमें ऑक्सीजन रिफीलिंग के समय सफाई का ध्यान रखा जाता है। डॉ. ताहिर, प्रभारी, खेकड़ा कोविड अस्पताल।