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UP: केनरा बैंक के फील्ड ऑफिसर से डीजीपी तक का सफर, गांव के अनुराग धनखड़ ने मेहनत से रचा इतिहास

Tue, 21 Jul 2026 05:34 PM IST
Dimple Sirohi मुकेश पंवार, संवाद न्यूज एजेंसी, बागपत

सार

बागपत के बिहारीपुर गांव के अनुराग धनखड़ ने 21 वर्ष की उम्र में केनरा बैंक के फील्ड ऑफिसर से कॅरिअर शुरू किया और मेहनत के दम पर आईपीएस अधिकारी बनकर त्रिपुरा के डीजीपी तक पहुंचे।
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अनुराग धनखड़ की फाइल फोटो। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बड़ौत में महज 21 वर्ष की उम्र में केनरा बैंक के फील्ड ऑफिसर से कॅरिअर शुरू करने वाले बिहारीपुर गांव के अनुराग धनखड़ ने अपनी मेहनत के दम पर पहले आईपीएस तक का सफर तय किया। इसके बाद पुलिस सेवा में अहम पदों पर रहते हुए शीर्ष पद त्रिपुरा के डीजीपी तक पहुंचे। निष्पक्ष कार्यशैली और बेदाग सेवा ने उन्हें देश के भरोसेमंद पुलिस अधिकारियों में स्थापित किया।

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बागपत मुख्यालय से सात किलोमीटर दूर बिहारीपुर गांव के रहने वाले अनुराग धनखड़ का चयन वर्ष 1988 में केनरा बैंक में फील्ड ऑफिसर के पद पर हो गया था। उनका सपना सिविल सेवा में जाना था।

इसलिए बैंक की नौकरी के साथ सिविल सेवा की तैयारी जारी रखी और वर्ष 1994 में सिविल सेवा में चयन हो गए, जो आईपीएस अधिकारी बने। त्रिपुरा कैडर मिलने के बाद उन्होंने कानून व्यवस्था, खुफिया तंत्र और केंद्रीय एजेंसियों में कई अहम जिम्मेदारियां निभाई। शांत कार्यशैली, निष्पक्ष निर्णय क्षमता और नेतृत्व कौशल के कारण वह हर जिम्मेदारी पर अपनी अलग छाप छोड़ते गए।
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वह प्रतिनियुक्ति पर केंद्रीय सुरक्षा बल व एजेंसियों में कई अहम पदों पर रहे। सितंबर 2023 में एडीजीपी बनने के बाद इंटेलिजेंस और लॉ एंड ऑर्डर का प्रभार संभाला। मई 2025 में उन्हें त्रिपुरा का डीजीपी नियुक्त किया गया। उत्कृष्ट सेवाओं के लिए उन्हें पुलिस मेडल (सराहनीय सेवा) और राष्ट्रपति पुलिस पदक (विशिष्ट सेवा) से सम्मानित किया गया।

-गांव के प्राथमिकी विद्यालय से रखी पढ़ाई की नींव
अनुराग धनखड़ ने कक्षा पांच तक की पढ़ाई बिहारीपुर के प्राथमिक विद्यालय से की। इसके बाद जनता वैदिक इंटर कॉलेज से इंटरमीडिएट किया। मैसूर से फूड टेक्नोलॉजी में पोस्ट ग्रेजुएशन किया। पुलिस सेवा में आने के बाद भी उन्होंने उस्मानिया यूनिवर्सिटी से पुलिस मैनेजमेंट में मास्टर्स और एनएएलएसएआर यूनिवर्सिटी से साइबर क्राइम में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया।

दादा जेलर रहे तो पिता ने प्रधान बनकर की सेवा
अनुराग धनखड़ ऐसे परिवार से थे, जहां जनसेवा और अनुशासन की परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही थी। उनके दादा हीरा सिंह मेरठ में जेलर रहे, जबकि पिता स्वर्गीय सत्यपाल सिंह करीब दो दशक तक बिहारीपुर के ग्राम प्रधान रहे। मां रघुवीरी देवी हैं।

बड़े भाई विवेक कुमार भारतीय वायुसेना से सेवानिवृत्त हैं और दिल्ली में रहते हैं। छोटे भाई रविराज धनखड़ बड़ौत के गांधी रोड पर खिलौनों का कारोबार करते हैं। पत्नी कल्पना धनखड़ उनके साथ रहती थीं, जबकि इकलौता बेटा अभिषेक धनखड़ कनाडा में एक निजी कंपनी में कार्यरत है।
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दिसंबर में बजनी थी बेटे की शादी की शहनाइयां
अनुराग धनखड़ के बेटे अभिषेक धनखड़ की शादी चंडीगढ़ निवासी नेहा के साथ दोनों परिवारों की सहमति से तय हुई थी। शादी के लिए दिसंबर की तारीख तय हुई। अनुराग धनखड़ के ममेरे भाई उपेंद्र प्रधान ने बताया कि करीब तीन-चार महीने पहले दिल्ली में अंगूठी पहनाने की रस्म भी हो चुकी थी। परिवार शादी की तैयारियों में जुटा था, लेकिन अनुराग धनखड़ की मौत से परिवार में मातम है।
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