बागपत। महावतपुर बावली गांव में वर्ष 2014 में मजदूर सुशील की हत्या करने वाले भाइयों समेत पांच युवकों को अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश/एफटीसी द्वितीय नीरू शर्मा ने उम्रकैद की सजा सुनाई। ढोल बजाकर नाचने का विरोध करने को लेकर हुए विवाद में उसकी हत्या की गई थी। उन पर 25-25 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया। अर्थदंड अदा न करने पर एक वर्ष अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।
महावतपुर बावली निवासी संजू ने 13 नवंबर 2014 को बड़ौत कोतवाली पर हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था। उसका कहना था कि 13 नवंबर की शाम उसका भाई सुशील गांव के ही श्यामे के खाली पड़े मकान पर बैठा हुआ था। वह मजदूरी करता था। तभी उनके घर के पास गांव के ही कुछ युवक ढोल बजाकर नाचने लगे।
उसकी बहन कल्लो ने उन्हें ढोल बंद करने के लिए कहा, तो वह झगड़ा करने लगे और उन्होंने सुशील को घेर लिया। इसके बाद पप्पन, उसके भाई मोंटी, शरद, भगतसिंह, उसके भाई संजय ने उसके भाई पर दराती व अन्य धारदार हथियारों से हमला बोल दिया। इसमें वह गंभीर रूप से घायल हो गया। उसे उपचार के लिए अस्पताल ले गए। जहां उसकी मौत हो गई।
बड़ौत पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। पुलिस ने सभी के खिलाफ न्यायालय में चार्जशीट दाखिल की। यह मुकदमा अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश/एफटीसी द्वितीय के न्यायालय में चल रहा था। इसमें बृहस्पतिवार को दोषसिद्ध होने पर पप्पन, शरद, भगतसिंह, मोंटी और संजय को उम्रकैद की सजा सुनाई गई। साथ ही उनपर 25-25 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया। अर्थदंड अदा न करने पर एक साल अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।