बागपत। फाइलों में ही जिले के गांव की ओडीएफ बनाने की योजना परवान चढ़ रही है। धरातल पर सब कुछ उलट पलट है। 55 गांवों को खुले में शौच मुक्त बनाना था, लेकिन आंकड़ा आसपास भी नहीं पहुंचा। प्रशासन के दावे झूठे साबित हो रहे हैं।
स्वच्छ भारत मिशन के तहत जिले को खुले में शौच मुक्त बनाने का चयन हुआ था। इससे पहले 55 गांवों को अप्रैल माह में ओडीएफ बनाने के लिए योजना बनाई थी। प्रशासन की योजनाएं फाइलों में ही सिमट कर रह गई है। ऑफिसों में बैठकर गांवों को खुले में शौच मुक्त बनाने का लक्ष्य बनाया था। पहले चक्र में अप्रैल माह में 55 गांवों को खुले में शौच मुक्त बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया था। शुरूआत के दिनों में सर्वे तो तेजी के साथ किया। घर-घर जाकर लोगों से जानकारियां ली। गांवों में अनुदान पर घरों में शौचालय बनाए जाने थे।
जिला पंचायत राज विभाग के कार्यक्रम समन्वयक नरेंद्र उज्ज्वल ने बताया अभी तक 55 गांवों में से 24 गांव ही ओडीएफ है, बाकी सात गांवों में शौचालय बनकर तैयार हो गए है। उन्होंने बताया मंडल स्तर से पुरा महादेव और नंगला रवा गांव ओडीएफ हो चुके हैं। जिला स्तर पर 24 गांव को ओडीएफ घोषित करा दिया, लेकिन प्रगति आधी अधूरी है।
धीमी गति से जिला तो दूर 55 गांव को ही ओडीएफ कराना चुनौती है। सीडीओ हाकिम सिंह ने बताया 55 गांवों में शौचालय बनकर तैयार है। उनमें थोड़ी बहुत कमियां रह गई थी, जिस कारण उन्हें ओडीएफ नहीं कराया जा सका था। शीघ्र इन गांवों को खुले में शौच मुक्त करा दिया जाएगा।