बागपत। एआरटीओ कार्यालय दलालों के चंगुल में है। यहां दोपहर दो बजे तक आम लोगों को लाइन में खड़ा होना पड़ता है। उन्हें खूब चक्कर कटाए जाते हैं। वहीं, तीन बजे के बाद दलालों की फाइलें सीधी पहुंचती हैं और वे तेजी से दौड़ती हैं। इसके चलते दलाल लोगों से मोटी रकम वसूलते हैं।
फाइलों पर अपने नंबर डालकर भेजते हैं दलाल
एआरटीओ कार्यालय में फाइलों को जमा कराया जाता है तो जिन फाइलों को दलाल भेजते हैं, उन पर पैन से नंबर डाल दिया जाता है। उसका रिकार्ड दलाल अपने पास रखते हैं। ऐसी ही फाइलें एआरटीओ कार्यालय में सबसे ऊपर लगाई जाती हैं। जिनमें वाहनों की फिटनेस, जब्त वाहनों को छुड़वाना, रजिस्ट्रेशन आदि शामिल हैं। जबकि ड्राइविंग लाइसेंस में फोटो के लिए ऑनलाइन समय मिलने के बाद कुछ स्थिति सुधरी है। जिन फाइलों को दलाल कार्यालय में भेजते हैं, उनका दोपहर बाद कार्यालय में जाकर हिसाब किया जाता है।
गाड़ियों में खुल जाते हैं दफ्तर, वीडियो में कैद
एआरटीओ कार्यालय के बाहर कुछ लोगों ने खोखे रखे हुए हैं। किसी ने छप्पर डाला हुआ है। वहीं, अब एक नए तरीके के ऑफिस खुलने शुरू हो गए हैं। लोग गाड़ी में लैपटॉप लेकर आते हैं और वहां एंट्री करने के साथ ही ऑनलाइन फार्म आदि भरते हैं। वहीं, दोपहर बाद कार्यालय के अंदर का काम कराते हैं और शाम को लौट जाते हैं। एआरटीओ कार्यालय के बाहर कई दलाल वीडियो में कैद हो गए हैं।
मेरी टूरिस्ट बस चलती है, जिसको ईपीई से पकड़ लिया गया था। मैं उस बस को छुड़वाने के लिए डेढ़ महीने से चक्कर काट रहा हूं। बस नहीं छोड़ी जा रही है, जबकि मैं सभी कागज पूरे कर चुका हूं।-सोनू चौहान, मेरठ
मैं लाइसेंस बनवाने के लिए कई दिन से चक्कर काट रहा हूं। एआरटीओ कार्यालय में बातचीत करने जाता हूं तो वे बाहर भगा देते हैं। बाहर बैठे लोग ज्यादा पैसे मांगते हैं। यहां के दस से ज्यादा चक्कर काटकर परेशान हो गया हूं।-वसीम, बड़ौत रोड बागपत
एआरटीओ का अजीब बयान
कार्यालय में काफी लोग घूमते रहते हैं। उनमें दलाल कौन है, यह कैसे पता लगाया जाएगा। कार्यालय के बाहर कौन क्या कर रहा है, इस बारे में मैं कुछ नहीं कह सकता हूं।- सुभाष राजपूत, एआरटीओ