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बड़ा खुलासा: मेरठ में तैयार हुए थे 14 स्टाफ नर्सों के फर्जी ऑफर लेटर, लखनऊ में खुली पोल, सामने आया असली सच

Wed, 11 Aug 2021 07:55 AM IST
मेरठ ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बागपत

सार

केंद्र सरकार से अनुबंधित एजेंसी सैम्स के फर्जी ऑफर लेटर से बागपत स्वास्थ्य विभाग में संविदा पर 14 स्टाफ नर्स अक्तूबर 2019 में भर्ती हो गई थी।
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स्टाफ नर्स
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विस्तार
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बागपत में स्वास्थ्य विभाग में संविदा पर 14 स्टाफ नर्स को फर्जी ऑफर लेटर तैयार करके भर्ती करने के मामले में पुलिस को बड़ी कामयाबी मिली है। इस मामले में पुलिस ने फर्जी ऑफर लेटर तैयार करने वाले मेरठ के साइबर कैफे संचालक सचिन गोयल को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने पूछताछ के बाद कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया है।

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केंद्र सरकार से अनुबंधित एजेंसी सैम्स के फर्जी ऑफर लेटर से बागपत स्वास्थ्य विभाग में संविदा पर 14 स्टाफ नर्स अक्तूबर 2019 में भर्ती हो गई थी। 20 नवंबर 2019 को एक स्टाफ नर्स की सीएचसी पर तैनाती करते समय तत्कालीन सीएमओ डॉ. जितेंद्र वर्मा को कागजात फर्जी होने का शक हुआ था। कागजों की जांच कराने पर फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ था। एसीएमओ डॉ. एसपी सिंह ने कोतवाली पर पहले आठ स्टाफ नर्सों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। इसके बाद में अन्य छह के खिलाफ शिकायत की थी। पुलिस ने उनके नाम भी केस में शामिल कर लिए थे।

जांच अधिकारी एसआई सुरेंद्र सिंह का कहना है कि इस मामले में सचिन गोयल पुत्र दिनेश गोयल निवासी मलियाना, मेरठ को कस्बा अग्रवाल मंडी टटीरी से गिरफ्तार किया गया है। उसने पूछताछ में बताया कि उसका मेरठ के एक निजी अस्पताल के बाहर साइबर कैफे है। अस्पताल की स्टाफ नर्स सरिता की पैन ड्राइव में संविदा स्टाफ नर्स का एक ऑफर लेटर था। सरिता के कहने पर ऑफर लेटर में छेड़छाड़ करके अन्य कई ऑफर लेटर तैयार किए। इन ऑफर लेटर को सरिता ने अपनी मेल आईडी से अलग-अलग कई मेल आईडी पर भिजवाया था। सरिता को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि अन्य कई स्टाफ नर्स की जमानत हो चुकी है।

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लखनऊ से पुष्टि कराने पर खुला फर्जीवाड़ा
स्वास्थ्य विभाग में ज्वॉइन करने के लिए सभी फर्जी स्टाफ नर्स खुद ही अपना ऑफर लेटर लेकर आई थी। विभाग ने उस समय जांच करने की जगह उनको सीधा ज्वॉइन करा दिया। मगर, एक स्टाफ नर्स के कागज फर्जी होने का शक हुआ तो सभी के बारे में लखनऊ से पुष्टि कराई गई। वहां से बताया गया कि उनके यहां से किसी को ऑफर लेटर नहीं दिया गया है। तब इस पूरे मामले का खुलासा हुआ था।

तीन महीने तक करती रही ड्यूटी, वेतन भी लिया
संविदा स्टाफ नर्स राखी, साक्षी, वंदना प्रियदर्शनी, रेनू, उर्मिला, मोनी भारद्वाज, सायरा बानो, अलका वर्मा, अनीता कुमारी, इंदु, वंदना देवी, अंजू समेत 14 के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ था। इनमें कोई दो महीने तक नौकरी करती रही तो किसी ने तीन महीने तक नौकरी की। इन सभी को विभाग से वेतन भी जारी होता रहा। जब फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ तो उसके बाद कार्रवाई की गई।
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