आपको जानकर हैरानी होगी कि पिछले चार माह में इन डिपो से लगभग 600 से अधिक परिचालक नौकरियां छोड़ चुके हैं। इसी वजह से तकरीबन 350 से अधिक बसें डिपो में धूल फांक रही हैं। यदि बड़ौत डिपो की बात करें तो कंपनी से यहां पर 70 परिचालक नियुक्त हुए थे, जिनमें से 40 से अधिक परिचालक मानदेय न मिलने की वजह से नौकरियां छोड़ चुके हैं। भैंसाली डिपो से तकरीबन 100, मेरठ से 150, सोहराबगेट से 70 के अलावा गंगोह, शामली, मुजफ्फरनगर समेत अन्य जगहों से लगभग 600 परिचालक नौकरियां छोड़ चुके हैं।
लड़खड़ाई परिवहन व्यवस्था, लगातार लखनऊ पहुंची रहीं शिकायतें
एक तरफ जहां समय पर मानदेय न मिलने की वजह से परिचालक लगातार नौकरियां छोड़ रहे हैं। वहीं परिचालकों के अभाव में डिपो पर बस खड़े होने की वजह से इन डिपो के अंतर्गत आने वाले मुख्य रूट से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में परिवहन व्यवस्था बुरी तरह से लड़खड़ाई गई है। रोजाना लोग मुख्यालय पर नियमित बसों के संचालन की मांग कर रहे हैं।
अधिकारियों का बढ़ रहा सिरदर्द, नहीं हो रहा अनुबंध
लगातार परिचालकों की कमी होने की वजह से विभागीय अधिकारियों का सिरदर्द बढ़ रहा है, क्योंकि उन्हें माह का राजस्व लक्ष्य भी पूरा करना है। साथ ही परिचालकों की कमी के बावजूद मुख्य रूटों समेत ग्रामीण क्षेत्रों में परिवहन व्यवस्था दुरुस्त करनी है। विभागीय अफसरों के अनुसार मुख्यालय से कंपनी का सालाना अनुबंध नहीं हो पा रहा है। इसकी वजह से सभी परेशान हैं।
बात यह है कि परिचालकों को काफी समय से मानदेय नहीं मिल रहा है और इसकी वजह से परिचालक नौकरियां भी छोड़ रहे हैं। इसका मुख्य कारण एसएस एंटरप्राइज कंपनी का मुख्यालय स्तर से सालाना अनुबंध न होना है। इसको लेकर कंपनी व मुख्यालय को पत्र लिखा है ताकि समय रहते व्यवस्था पटरी पर आ जाए।- संदीप नायक आरएम मेरठ।
समय पर मानदेय न मिलने की वजह से परिचालक नौकरियां छोड़ रहे हैं। इसको लेकर आरएम मेरठ समेत मुख्यालय को पत्र लिखा है। पत्र के माध्यम से समय पर परिचालकों को मानदेय देने का आग्रह किया गया है।- भुवनेश्वर कुमार, एआरएम बड़ौत।