पति के बाद पेंशन थी सहारा तो अन्य का इससे हो रहा था गुजारा
हेवा गांव की बेदो के पति मलखान की 16 साल पहले मृत्यु होने पर पेंशन से सहारा मिल रहा था मगर इनकी भी पेंशन पिछले साल ही बंद कराई गई। शाहपुर बड़ौली गांव के छंगे की स्थिति भी यही थी। इनकी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने पर पेंशन से काफी सहारा मिलता था। इनकी पेंशन भी एक साल बंद की गई थी।
ट्योढ़ी गांव के प्रकाशचंद को तीन साल पहले वृद्धावस्था पेंशन मिलनी शुरू हुई थी। इनको मृतक बताकर अक्तूबर 24 से पेंशन रुकवा दी गई थी। फतेहपुर पुट्ठी की रामकली की पांच साल पहले पेंशन शुरू हुई और इनको भी एक साल से पेंशन नहीं मिली।
सचिवों के खिलाफ कार्रवाई होगी
इस पूरे मामले में सचिवों की लापरवाही सामने आई है। इसलिए ही सचिवों के खिलाफ कार्रवाई के लिए पत्र सीडीओ को भेजा गया। सचिवों के खिलाफ जल्द जांच कराकर विभागीय कार्रवाई के लिए लिखा गया है।
जिन बुजुर्गों को मृतक दिखाकर पेंशन बंद की गई थी, उनकी पेंशन लखनऊ से शुरू करा दी गई है। इनके अलावा भी किसी को पेंशन से संबंधित कोई समस्या होती है तो वह मुझसे आकर मिल सकते हैं, उनकी समस्या का समाधान कराया जाएगा। - ज्योति शर्मा, एसडीएम
बागपत में मार दिए बुजुर्ग, लखनऊ में हुए जिंदा की खबर से संबंधित फोटो। प्रकाशचंद- फोटो : samvad
बागपत में मार दिए बुजुर्ग, लखनऊ में हुए जिंदा की खबर से संबंधित फोटो। प्रकाशचंद- फोटो : samvad
बागपत में मार दिए बुजुर्ग, लखनऊ में हुए जिंदा की खबर से संबंधित फोटो। प्रकाशचंद- फोटो : samvad