बागपत। प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी में आर्थिक रूप से कमजोर लोगों ने इस उम्मीद से आवेदन किया था कि उन्हें जल्द छत मिलेगी। लोगों का यह सपना कई साल बाद भी पूरा नहीं हुआ, बल्कि उनकी परेशानी बढ़ गई है। किसी ने मकान जल्द बनने की उम्मीद में पुराना मकान तोड़ दिया। अब उन्हें पड़ोसियों के यहां शरण लिये हैं। वहीं, किसी को मकान पूरा नहीं बनने पर छप्पर के नीचे सिर छिपाना पड़ रहा है। बारिश व सर्दी में हालत खराब हो जाती है। अधिकारी केवल शासन से किस्त नहीं आने की जानकारी देकर पल्ला झाड़ रहे हैं। वे अपनी जिम्मेदारी समझकर कोई कदम तक नहीं उठा रहे हैं। हालांकि लोग उनके कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं।
सिर छिपाने तक की जगह नहीं
केस एक
नगर के केतीपुरा मोहल्ले की साबरी के पति नूरद्दीन की बीमारी के चलते 12 साल पहले मौत हो गई थी। उसके दो बच्चे हैं। वह मजदूरी करके परिवार का गुजारा करती है। उसने दो साल पहले मकान बनवाने के लिए आवेदन किया था। उसने करीब छह महीने पहले पहली किस्त मिली तो उसने मकान तुड़वा दिया था। मकान की दूसरी किस्त नहीं मिलने पर अधूरा पडृा है। वह बच्चों के साथ पड़ोसी के यहां रह रही है। सर्दी में वहां सोने की जगह नहीं है। इसलिए ठंड में खुले में सोना पड़ रहा है।
छप्पर में रहना पड़ रहा
केस दो
ईदगाह मोहल्ला निवासी सितारा पत्नी साजिद ने मकान बनवाने के लिए दो साल पहले आवेदन किया था। उसकी दो किस्त आई हुई हैं, लेकिन मकान पूरा नहीं बन सका। वह भी बारिश के चलते क्षतिग्रस्त हो गया था। उस पर छत तक नहीं है। तीसरी किस्त समय पर मिल जाती तो वह पूरा बन जाता। परिवार में दस सदस्यों का क्षतिग्रस्त मकान में रहना मुश्किल है। इस कारण बराबर में छप्पर डालकर रहना पड़ रहा है।
वर्जन
जिनकी किस्त काफी वक्त से नहीं आई है, उसके लिए उच्चाधिकारियों को पत्र भेजा जाएगा। इसका पूरा डाटा निकलवाया जा रहा है, जिससे जल्द से जल्द सभी की किस्त जारी कराई जा सके।-रजनी पुंडीर, परियोजना अधिकारी डूडा