बड़ौत (बागपत)। उपाध्याय गुप्ति सागर महाराज ने कहा कि सबसे कठिन है, अपने अंदर अहम के टुकड़े करना, क्योंकि अहम ने तो रावण को भी मौत की शैय्या पर लेटा दिया ।
वे बुधवार को दिगंबर जैन अतिथि भवन में धर्मसभा में बोल रहे थे। धर्मसभा का शुभारंभ मंगलाचरण से किया। उपाध्याय श्री ने कहा कागज के टुकड़े करना सरल है, कपड़े़ के उससे कुछ कठिन, लोहे या लकड़ी के उस से भी ज्यादा कठिन। दुनिया में अगर सबसे ज्यादा कठिन अपने मन में रह रहे अहम के टुकडे़ करना होता है, जिसने भी अपने अहम के टुकड़े कर दिए, वह अर्हम बन सकता है, उसको अर्हम बनने से कोई नहीं रोक सकता। अहम के कारण ही रावण का पतन हो गया, उसका सर्वनाश हो गया, इसीलिए ताकत के रुपये के अहम में चूर होकर कभी साधु संतों और किसी भी संसारी प्राणी का अपमान नहीं करना, सबका सम्मान करना सबसे मधुर व्यवहार करना, क्योंकि जब जीर्ण शीर्ण अवस्था में मृत्यु शैय्या पर पड़े होंगे, तब ना ताकत काम आएगी, न ही रुपये, इसीलिए अपने मन से अहम का त्याग करो, धर्म करो, क्योंकि जिसने अपने अहम का त्याग कर दिया, उसका समाज में देश में नाम और सम्मान होता है। सभा का संचालन अमित जैन ने किया। इसमें पंकज जैन अजय, अनिल सुख माल, दिनेश, राज कुमार, सिद्धार्थ, आदिश, कृष्णा, अंजू, शालिनी, मोनिका, दीपा आदि भक्त शामिल रहे। सांय कालीन गुरु भक्ति में अनुज जैन पारस, संदीप, टी सी आदि ने संगीत की मधुर स्वर लहरियों के साथ गुरु वंदना की।