बागपत। ग्राम सचिवों का अधिकारियों से विवाद शुरू हुआ तो गांवों में विकास कार्य ठप हो गए। ग्राम सचिव कार्य बहिष्कार करके धरने पर बैठे हुए हैं और ठेकेदार भुगतान नहीं होने पर काम अधूरे छोडक़र चले गए हैं। वहीं ग्राम प्रधान भी विकास कार्य शुरू कराने के लिए अधिकारी नामित करने की मांग उठाने लगे हैं।
जिले के अधिकतर गांवों में खड़ंजे, पंचायतघर व सामुदायिक शौचालयों आदि का निर्माण समेत अन्य विकास कार्य कराए जा रहे थे। ये सभी कार्य ग्राम सचिवों की देखरेख में हो रहे थे। डीपीआरओ से विवाद होने पर ग्राम सचिवों ने 31 अगस्त से कार्य बहिष्कार कर विकास भवन पर धरना शुरू कर दिया था। यह धरना 16 सितंबर को खत्म जरूर हुआ, लेकिन ग्राम सचिवों व डीपीआरओ का विवाद जारी रहा। जिससे ग्राम सचिवों ने तीन दिन पहले दोबारा कार्य बहिष्कार कर धरना शुरू कर दिया। इससे गांवों में विकास कार्य ठप हो गए हैं। ठेकेदारों को भुगतान नहीं हो रहा है। इसके चलते उन्होंने कार्य करने से इनकार कर दिया है। इससे ग्राम प्रधान व ग्रामीणों की परेशानी बढ़ गई है।
अधिकारी नामित करने की मांग उठाई
बड़ौत ब्लॉक के प्रधान हरेंद्र सिंह, विक्रांत तोमर, सोहनपाल सिंह, प्रवीण कुमार, रणवीर सिंह, बालो, कविता, स्वीटी, मांगेराम, सुरेंद्रपाल सिंह, संजीव, संतकुमार, सोनू त्यागी, कुर्बान त्यागी, विनोद पंवार, पवन कुमार, उपदेश आदि बुधवार को कलक्ट्रेट पहुुंचे। उन्होंने बताया कि ग्राम सचिवों के हड़ताल पर चले जाने से गांवों के विकास कार्य ठप हो गए हैं। इससे उन्हें परेशानी हो रही है। इसलिए ग्राम सचिवों को दूसरे जिलों में स्थानांतरित करने के साथ विकास कार्य शुरू कराने के लिए अधिकारी नामित किए जाएं।
सभी ग्राम सचिवों को गांवों में जाकर काम करने के लिए कहा गया है। जिन्हें निलंबित किया गया है उनके बारे में जांच के आधार पर फैसला लिया जाएगा। अब ग्राम सचिव अपने विवेक से निर्णय लेंगे। गांवों में फिलहाल कुछ विकास कार्य बंद हैं। इस समस्या का जल्द समाधान निकाला जाएगा।-रणजीत सिंह, सीडीओ