बागपत/बड़ौत। यहां की बेटियां नए आयाम छू रही हैं। देश की सर्वोच्च प्रतियोगी परीक्षा पास करके अफसर बनने से लेकर सेना में जाकर देश की सुरक्षा करने में बेटियां पीछे नहीं हैं। खेलों के सहारे भी अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर खूब नाम कमा रही हैं। ऐसी ही कई बेटियाें की कहानी साझा कर रहे हैं।
जिंदगी की कठिनाई पार करके आईएएस बनीं सना
बागपत में कोर्ट रोड स्थित गली नंबर छह निवासी सना अख्तर ने कभी आईएएस बनकर देश सेवा करने का सपना देखा था। उस सपने के साथ ही पढ़ाई की। जिंदगी में खूब कठिनाइयां आईं। पिता तमीम अख्तर की दर्जी की दुकान थी। आर्थिक कठिनाई के बावजूद सना ने सपना नहीं टूटने दिया। उन्होंने यूपीएससी की परीक्षा देकर पहली बार में ही वर्ष 2014 में आईएएस बन गईं। अब वह पश्चिम बंगाल में सेवाएं दे रही हैं। सना अख्तर कहती हैं कि प्रत्येक लड़की सपना पूरा करने के लिए हर कठिनाई को पार करना होगा।
हिम्मत के सहारे आईपीएस बनीं आंचल
बागपत में बड़ौत रोड स्थित चौहान एन्क्लेव निवासी आंचल चौहान ने सिविल सेवा में जाने का सपना संजोया। परिवार ने बेटी का सपना पूरा करने में खूब साथ दिया। आंचल ने वर्ष 2016 में बीटेक करने के बाद सिविल सर्विस की तैयारी शुरू की थी। उन्होंने दो बार कामयाब नहीं मिलने के बावजूद हिम्मत नहीं हारी। आखिरकार वर्ष 2019 में सिविल सेवा में कदम रखा और आईपीएस बन गईं। आंचल कहती हैं कि बेटियां किसी से कम नहीं हैं। उन्हें अपनी मेहनत के साथ ही परिवार व समाज के प्रोत्साहन की जरूरत है।
लेफ्टिनेंट बनकर देश सुरक्षा कर रहीं साक्षी
मलकपुर गांव निवासी साक्षी तोमर पुत्री राकेश तोमर जनपद की पहली महिला लेफ्टिनेंट हैं। सेना में उच्च पद पर जाकर साक्षी ने साबित कर दिया कि बेटियां किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं। उनका कहना है कि जब माता-पिता भरोसा करते हैं तो उसे नहीं तोड़ना चाहिए। वे मुश्किलों से गुजरकर बेटियों को पढ़ाते हैं। आज भी समाज में बहुत से लोग ऐसे हैं जो मानते हैं कि बेटी पढ़-लिखकर क्या करेगी। वह कहती हैं कि लड़कियां पढ़ाई से लेकर खेलकूद के क्षेत्रों में आगे हैं। बेटियां का आत्मविश्वास बढ़ाने की जरूरत है।
अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर नाम रोशन कर रहीं कोमल
हिलवाड़ी निवासी कोमल खान वेटलिफ्टिंग में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर नाम रोशन कर रही हैं। वह अब तक 22 पदक जीत चुकी हैं। कोमल खान अपने दम पर विश्वविद्यालय स्तर से लेकर राज्य स्तर तक पहुंचीं। अब राष्ट्रीय व अंतराष्ट्रीय स्तर पर भी कई पदक जीत चुकी हैं। उनका कहना है कि ग्रामीण अंचल में बहुत से ऐसे लोग हैं जो बेटियों को पढ़ाई व खेलों में आगे बढ़ा रहे हैं। ऐसे माता-पिता को सलाम। कोमल खान कहती हैं कि बेटियों को पढ़ाई या खेलों के क्षेत्र में मन लगाकर प्रतिभाग करना चाहिए।