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संवाद न्यूज एजेंसी
बागपत। कोरोना महामारी ने कई परिवारों को जिंदगीभर भर का दंश दे दिया। कई मासूमों के भविष्य पर संकट खड़ा कर दिया। परिवार में कमाने वाले इकलौते व्यक्ति के चले जाने से मासूमों के भरण-पोषण और पढ़ाई में भी दिक्कतें सामने आ सकती हैं।
बड़ौत ब्लॉक क्षेत्र के एक गांव निवासी व्यक्ति चीनी मिल में नौकरी करते थे। परिवार में पत्नी के अतिरिक्त 15 साल का बेटा और 10 व 8 साल की दो बेटियां हैं। उनके परिवार में अब कोई कमाने वाला नहीं रहा है। गृहस्वामी पिछले दिनों बीमार हुए तो उन्हें मेरठ के सुभारती अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहां छह दिन उपचार चलने के बाद भी तबीयत बिगड़ती चली गई। इसके परिणामस्वरूप उनकी बीती 26 मई को मृत्यु हो गई। परिवार पर मानो दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। तीनों बच्चों के भरण-पोषण और पढ़ाई के खर्च की समस्या अब इस परिवार के सामने खड़ी हो गई है। पति की मौत के बाद बच्चों की मां उनके भविष्य को लेकर बहुत चिंतित है। फिलहाल तो ये भी समझ में नहीं आ रहा है कि क्या करें।