बागपत। जेल में हत्या के बाद कई सवाल अनसुलझे हैं। आखिर ऐसी क्या वजह है कि सुनील राठी को बजरंगी पर गोली चलानी पड़ गई। वारदात के पीछे असली चेहरे कौन है। बागपत से लेकर लखनऊ और दिल्ली तक ऐसे लोग पुलिस की रडार पर आ गए हैं, क्या राजनीतिक षड्यंत्र रचा गया, क्या अपराध जगत के दो डॉन आपस में वर्चस्व को लेकर भिड़े। बयान शुरू हो गए हैं। इतना तय है कि नतीजे आने के बाद बड़े-बड़े चेहरे बेनकाब होंगे।
बागपत जेल में सुनील राठी और मुन्ना बजरंगी की कुछ देर की मुलाकात को ही हत्या की वजह नहीं माना जा सकता है। पर्दे के पीछे बड़ा षड्यंत्र रचा गया। इस साजिश से बजरंगी का परिवार अंजान नहीं था। यही वजह है कि बागपत जेल में तलबी की बात आते ही सीमा सिंह लखनऊ में मीडिया से रूबरू हुई। जाहिर है कि परिवार को खतरे की जानकारी थी। हत्या के बाद पुलिस को उन चेहरों की तलाश है, जो इस वारदात के पीछे काम कर रहे हैं। क्या अकेला सुनील राठी ही वारदात में शामिल रहा है। जबकि राठी का कोई सीधा झगड़ा नहीं है। सुनील राठी का भाई अरविंद राठी जरूर पूर्वांचल की कई जेलों में बंद रहा है। वर्तमान समय में वह मेरठ जेल में बंद है। इस बिंदु पर भी जांच चल रही है कि बजरंगी के गुर्गों की कभी अरविंद राठी से तो भिड़ंत नहीं हुई। राजनीतिक षड्यंत्र का बिंदु भी जांच में शामिल है। मुन्ना बजरंगी की पत्नी सीमा सिंह सहित परिवार के अन्य लोगों ने लखनऊ और दिल्ली की सियासत के बड़े नाम गिनाए हैं। इसके अलावा उत्तराखंड में सुनील राठी का साम्राज्य फैला है। यह जांच की जा रही है कि कहीं बजरंगी तो उत्तराखंड में प्रापर्टी के धंधे में नहीं कूद गया था। पुलिस की जांच में माफिया डॉन बृजेश सिंह के अलावा सुशील मूंछ को भी शामिल किया है। यह भी आशंका है कि कहीं अपराधियों ने एक गठजोड़ कर तो वारदात को अंजाम नहीं दिया।