ऋषभदेव सभागार में आयोजित धर्मसभा में बोल विशुद्धसागर महाराज
सागरफोटो संख्या 1
बड़ौत। जैनाचार्य विशुद्धसागर ने कहा कि दीवार पर लगी घड़ी समय बताती है, पर किसी को चलाती नहीं है। एक व्यक्ति मंदिर जाता है और एक व्यक्ति मदिरालय जाता है। एक व्यक्ति प्रभु भक्ति करता है और उसी समय दूसरा व्यक्ति अशुभ कार्य करता है। अभिप्राय अनुसार व्यक्ति कार्य करता है। जिसे जो चाहिए, वह उसी का अनुसरण करता है।
जैनमुनि मंगलवार को ऋषभदेव सभागार में आयोजित धर्मसभा में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि जब-जब चित्त अस्वस्थ हो, तो भोजन और स्थान का परिवर्तन करो तो शीघ्र ही भाव परिवर्तित होगा, आप स्वस्थ हो जाएंगे। स्थान परिवर्तन करते ही भाव परिवर्तित होते हैं। जीवन में परिवर्तन आवश्यक है। द्रव्य, क्षेत्र, काल, भेष, भोजन और भाषा का भावों पर प्रभाव पड़ता है। सरस भोजन करो, सरस व्यवहार करो। मधुर सम्भाषण करो, शाकाहारी बनो। नीरस आहार करने से विषम धातु सम होती है। जिंदगी में सुकून चाहते हो तो समीकरण करना सीखो, जो अपने भावों को संभाल लेता है, उसका भव स्वयमेव संभल जाता है। भव-भव में नहीं भटकना है, तो भावों को संभालो। एक शब्द मित्र को शत्रु बना देता है और एक शब्द शत्रु को मित्र बना देता है। शब्दों को सोच-समझकर, संभल- संभलकर बोलो। सभा का संचालन पंडित श्रेयांस जैन ने किया। सभा में प्रवीण जैन, राकेश जैन, मनोज जैन,धन कुमार जैन, सुनील जैन, धनेद्र जैन, वरदान जैन मौजूद रहे।