बागपत। लोकसभा चुनाव में मतदान के मामले में छपरौली सबसे फिसड्डी रहा तो सिवालखास इस बार भी आगे ही रहा। एक भी विधानसभा पिछली बार के मतदान के आंकड़े को पार नहीं कर सकी और वर्ष 2019 के मुकाबले सभी जगह कम मतदान हुआ।
सिवालखास में वर्ष 2019 में सबसे ज्यादा 68.45 प्रतिशत मतदान हुआ था तो इस बार मतदान प्रतिशत भले ही गिरा हो, मगर अन्य विधानसभाओं के मुकाबले वहां सबसे ज्यादा 59.5 प्रतिशत मतदान हुआ। छपरौली की स्थिति सबसे ज्यादा खराब रही और यहां पिछली बार के 61.90 प्रतिशत के मुकाबले केवल 51.42 प्रतिशत मतदान हुआ। बड़ौत ने भले ही छपरौली को पछाड़ दिया हो, मगर पिछली बार के मुकाबले सबसे ज्यादा मतदान 10.5 प्रतिशत यहां गिरा है। बड़ौत में पिछली बार 63.97 प्रतिशत मतदान हुआ था और इस बार केवल 53.57 प्रतिशत हुआ है। बागपत विधानसभा में पिछली बार के 64.59 प्रतिशत मतदान के मुकाबले इस बार 56.83 प्रतिशत वोटर बूथों तक पहुंचे। जबकि मोदीनगर में पिछली बार 64.79 प्रतिशत मतदान हुआ था तो इस बार 58.26 प्रतिशत मतदान हुआ। इस तरह वर्ष 2019 के 64.59 प्रतिशत मतदान के मुकाबले 55.97 प्रतिशत मतदान हुआ।