किसान मसीहा पूर्व प्रधानमंत्री स्व. चौधरी चरण सिंह आज भी बागपत के लोगों के दिलों में बसते हैं। वह बागपत को अपना घर और लोगों को परिवार मानते थे। किसानों के हित के लिए हमेशा लड़ाई लड़ते रहे और सत्ता में रहते हुए उनके लिए कई बड़े फैसले भी लिए।
बागपत भले ही चौधरी चरण सिंह की जन्मभूमि नहीं थी, लेकिन बागपत उनकी कर्मभूमि रहा है और उनके पूरे जीवन का जुड़ाव बागपत से रहा। यहां की छपरौली सीट से पहली बार 1937 में विधायक बने और उसके बाद से लगातार यहां के लोगों ने उनको अपनी पलकों पर बैठाकर रखा। चौधरी चरण सिंह ने हमेशा किसानों के हितों के लिए फैसले लिए। उनके कारण ही प्रदेश में जमींदारी प्रथा का उन्मूलन हुआ और उन्होंने ही लेखपाल के पद का सृजन किया।