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सीसीटीवी कैमरे चौकियों पर लगे, जेब प्रभारियों की ढीली हुई

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बागपत। पुलिस अधिकारियों ने चौकियों पर सीसीटीवी कैमरे तो लगवा दिए, लेकिन विभाग से उनका भुगतान न होने से अब जेब चौकी प्रभारियों को ढीली करनी पड़ रही है। चौकी प्रभारियों को खुद से ही पंद्रह हजार रुपये तक का भुगतान करना पड़ा। सबसे ज्यादा व्यथा उन चौकी प्रभारियों की है, जिनका कैमरे लगवाते ही तबादला हो गया। पुलिस अधिकारी अब भी चौकी प्रभारियों को कैमरे लगवाने के रुपयों का भुगतान करने की जगह जनसहयोग से यह कार्य कराने की बात कह रहे है।
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आसपास की गतिविधियों पर नजर रखने और पुलिस पर कोई गलत आरोप नहीं लगा सके, इसके लिए सभी चौकियों में सीसीटीवी कैमरे लगाने के पुलिस अधिकारियों ने एक महीने पहले आदेश दिए थे। अधिकारियों के आदेशों पर चौकी प्रभारियों ने तुरंत अमल भी किया और करीब 20 चौकियों में सीसीटीवी कैमरे लगवाए गए। जिन चौकियों में पहले सीसीटीवी कैमरे लगे हुए थे और वह अच्छी क्वालिटी के नहीं थे तो उनको बदलवाकर अच्छी क्वालिटी का लगवाया गया। इस तरह एक चौकी पर करीब 15 हजार रुपये का खर्च सीसीटीवी कैमरे लगवाने में आया। उस समय चौकी प्रभारियों को लगा था कि विभाग से इसका भुगतान होगा। मगर, विभाग से इसका भुगतान करने से साफ इंकार कर दिया गया। जबकि सीसीटीवी कैमरे लगाने वाले भुगतान के लिए चौकी प्रभारियों के पास चक्कर काटने लगे तो उन्हें अपनी ही जेब ढीली करनी पड़ी।
कैमरे लगवाते ही कई प्रभारियों का तबादला हुआ
चौकी पर सीसीटीवी कैमरे लगवाने को 15 हजार रुपये अपनी जेब से खर्च करने की सबसे ज्यादा व्यथा उन चौकी प्रभारियों की है, जिन्होंने सीसीटीवी कैमरे लगवाए और उसके एक सप्ताह के अंदर ही उनका तबादला लाइन या अन्य थानों में हो गया। ऐसे में उनकी जेब से 15 हजार रुपये भी चले गए और उनसे चौकी भी छीन ली गई। वह अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे है कि जब इस तरह से रुपये खर्च कराए जाएंगे और वह रुपये विभाग से नहीं मिलेंगे तो किस तरह से काम किया जाएगा।
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चौकियों पर सीसीटीवी कैमरे लगवाए गए है, जिससे वहां के आसपास की गतिविधियों पर नजर रखी जा सके। इसके साथ ही सड़कों के किनारे वाली चौकियों के सामने से कोई आपराधिक घटना करके गुजरता है तो उसमें भी कैमरे सहायक होंगे। कैमरे कई मदों व जनसहयोग से लगवाए गए है। - मनीष कुमार मिश्र, एएसपी।
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