बड़ौत। नदियों के प्रदूषण ने तटों पर बसे गांवों में बीमारियों की सौगात दी है। इतना ही नहीं सामाजिक ताने-बाने को भी ध्वस्त कर दिया है। हाल यह है कि बागपत जिले के चौगामा क्षेत्र के 47 गांवों के लिए जल प्रदूषण कलंक बन गया है। वजह है कि गांवों के पास से गुजर रही हिंडन, काली और कृष्णा नदी में दूषित पानी बहने से चौगामा क्षेत्र बीमारियों की खान बन गया है।
बागपत जिला मुख्यालय से करीब 32 किलोमीटर दूर चौगामा क्षेत्र में बुरा हाल है। इससे गुजर रही हिंडन, काली और कृष्णा नदी में मात्र केमिकल युक्त पानी बहता है। जिससे भूजल प्रदूषित हो चुका है। इन नदियों में फैक्टरियों, चीनी मिल आदि का दूषित पानी डाला जाता है। जिससे इन नदियों के किनारे बसे 47 गांवों में शत-प्रतिशत हैंडपंप भी जहरीला जल उगलते हैं। मजबूरन लोगों को मौत का घूंट पीना पड़ रहा है। अमर उजाला टीम ने कुछ गांवों का दौरा किया तो हालात बदतर पाए गए।
बेटों के लिए नहीं मिल रही बहू
नदी किनारे बसे गांगनौली, झूड़पुर, तमेलागढ़ी, हिम्मतपुर सूजती, बामनौली, आजमपुर मुलसम, भगवानपुर, रहतना, खपराना, मौजिजाबाद नांगल, रहतना, मांगरौली, बरनावा, चिरचिटा, गल्हेता, शाहपुर बाणगंगा, खपराना, सरौरा, गढ़ी बंजारन, दोघट आदि गांवों के लोगों ने चौंकाने वाला खुलासा किया। गांगनौली के संजीव, रहतना के धर्मवीर, प्रदीप, खपराना के मनोज, बरनावा के इसरार व रंछाड़ के रवींद्र हट्टी ने बताया कि नदी किनारे बसे इनके गांवों में युवकों के रिश्ते आने बंद हो गए हैं।
बढ़ रही कुंवारों की फौज
इन गांवों में कुंवारों की फौज बढ़ रही है। एक आंकलन के मुताबिक 47 गांवों में 1500 लड़के ऐसे हैं। इनकी शादी नहीं हो रही है। माता-पिता बहू को तलाश कर थक चुके हैं। हालांकि बेटियों की शादी में कोई समस्या नहीं है।
यह है वजह
एक लड़की के पिता ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि नदी किनारे गांवों में बेटी ब्याहने का मतलब उसका जीवन संकट में डालना है। जल संकट से जूझ रहे इन गांवों में उनकी बेटी की शादी हो गई तो ताउम्र पछताना पड़ेगा।
खाप चौधरी भी चिंतित
पंवार खाप के चौधरी धर्मवीर सिंह ने कहा कि नदियों का प्रदूषण चिंता का विषय है। केंद्र व प्रदेश सरकार से हमारी यही मांग है कि वे तत्काल भूमिगत प्रदूषण से चौगामा को मुक्त कराएं। इसके लिए जल्द ही ठोस रणनीति तय की जाएगी।
सरकार इस ओर ध्यान दे
रंछाड़ गांव के रवींद्र हट्टी का कहना है कि कभी नदियां जीवनदायिनी रहीं, लेकिन अब इनका पानी दूषित हो चुका है। यह पीने लायक नहीं है। इससे फसलों की सिंचाई भी नहीं की जा सकती है। सरकार को इस ओर ध्यान देना चाहिए।
इन नदियों में नहाया करते थे
कंडेरा गांव निवासी धर्मवीर (80) का कहना है कि जब हम छोटे थे, तो नदियों में नहाया करते थे। पशु समेत अन्य जीव-जंतु पानी पिया करते थे। आज ये नदियां पूरी तरह से दूषित हो चुकी हैं। इनका पानी काला पड़ गया है। यह हैंडपंप के जरिए घरों तक पहुंच रहा है।
हैंडपंपों का पानी भी पीने लायक नहीं
असारा गांव के आबिद का कहना है कि नदी के दूषित पानी के कारण गांव में लगे हैंडपंप का पानी भी पीने लायक नहीं रहा है।