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आत्मा का इंद्रियों पर शासन करना ही ब्रह्मचर्य धर्म

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बरनावा के श्री चंद्रप्रभु मंदिर में पूजा अर्चना करते श्रद्धालु - फोटो : BARAUT
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संवाद न्यूज एजेंसी
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बिनौली। बरनावा के श्री चंद्रप्रभु दिगंबर जैन मंदिर में पर्युषण पर्व माघ माह के उपलक्ष्य में चल रहे दशलक्षण पर्व के दशम सोपान पर मंगलवार को श्रद्धालुओं ने उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म का अंगीकार किया। दस श्रीफल समर्पित कर भगवान चंद्रप्रभु की पूजा अर्चना की।
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पंडित प्रदीप पीयूष शास्त्री ने कहा कि ब्रह्मचर्य की उपासना का अवसर मात्र मानव को प्राप्त होता है, अन्य किसी भाग में यह संभव नहीं है। क्योंकि बुद्धि का पूर्ण विकास सोचने समझने की शक्ति मानव को ही प्राप्त है। उन्होंने कहा कि पांचों इंद्रियों को निरस्त कर देना, उन पर विजय प्राप्त कर आत्मा का एक छत्र शासन करना ब्रह्मचर्य कहलाता है। ब्रह्मचर्य की गहन अनुभूति ही जीवन में परिवर्तन लाती है। ब्रह्मचर्य परमात्मा के फूल को खिलाता है। मानव के हृदय को भरने में ब्रह्मचर्य ही पूर्ण सक्षम है। पूजा अर्चना में सतीश जैन, यश जैन, सार्थक, लोकेश जैन, राकेश जैन आदि उपस्थित रहे।
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