बागपत। जिला हत्या की वारदातों से दहल रहा है। पुलिस बेबस है। मई के महीने में ही जिले में हत्या की 12 वारदात हुई। जून के पहले ही दिन पांच हत्याओं का खूनी खेल हुआ। अधिकतर वारदातों के पीछे मामूली वजह सामने आई हैं।
बासौली गांव में किशोर शेखर की हत्या कर भाग रहे हमलावरों को ग्रामीणों ने घेर लिया। इनमें से दो को पीट-पीट कर मार डाला। ढिकाना में किसान की हत्या कर दी गई, इसके अलावा अशरफाबाद थल में भी लेन-देन के विवाद में हत्या हुई। यह खूनी खेल जून के पहले दिन ही खेला गया। इसके अलावा एक युवक पर जानलेवा हमला हुआ, जिसे मेरठ के अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस अपराध का ग्राफ रोकने में नाकाम साबित हो रही है। मई माह की बात करें तो 12 हत्याएं हुई। इनमें दो मई को जिला कारागार का सनसनीखेज ऋषिपाल हत्याकांड भी शामिल हैं। एक बैरक से निकलकर हमलावरों ने दूसरी बैरक में हमला बोलकर ऋषिपाल की हत्या कर दी थी। निवाड़ा में हाजी निसार की हत्या 16 मई को अंजाम दी गई।
यह रही प्रमुख वारदात
बागपत। दो मई को जिला कारागार में ऋषिपाल की हत्या के अलावा पांच मई को खिंदौड़ा गांव में दो सगे भाईयों की हत्या, इसी दिन नंगला कनवाड़ा गांव में यशपाल की हत्या, छह मई को बड़ौत में श्यामवीर की पीट-पीटकर हत्या की गई। आठ मई को दोघट के टिंकू की हत्या, 11 मई को दादरी में श्रीपाल का शव पेड़ पर लटका मिला। 13 मई को महरमपुर में कुलदीप की हत्या कर दी गई, यही नहीं बिनौली में 14 मई को पिता ने शराब पीकर घर आए बेटे की हत्या कर दी थी।
हत्याओं की वजह मामूली, पुलिस की चूक पड़ रही भारी
बागपत। हत्याओं की वजह मामूली रही है। कई वारदात ऐसी हैं, जिनमें पुलिस की चूक जानलेवा साबित हुई है। निवाड़ा को हाजी निसार हत्याकांड में पुलिस ने मामला दर्ज नहीं किया और मामला हत्या तक पहुंच गया। इसी तरह का मामला अब बासौली में सामने आया है। पुलिस ने पीड़ित पक्ष की तहरीर नहीं ली और देखते ही देखते खूनी खेल हो गया।