स्वर्णिम दौर देखा तो लगातार बिखराव भी होता रहा
भाकियू के 36 साल के इतिहास में संगठन ने स्वर्णिम दौर देखा तो लगातार बिखराव भी होता रहा। भाकियू की ताकत खाप चौधरियों के बीच मतभेद सामने आते रहे, अलग-अलग मंचों पर खाप चौधरी नजर आए। भाकियू के प्रदेश अध्यक्ष रहे कर्नल राममहेश भारद्वाज, भानुप्रताप सिंह ने भाकियू से अलग होकर संगठन बनाए। रविवार को लखनऊ में भाकियू अराजनैतिक के अध्यक्ष बने राजेश चौहान भी भाकियू के प्रदेश अध्यक्ष रहे हैं। भाकियू के कई टुकड़े हुए हैं। उत्तर प्रदेश में ही करीब एक दर्जन संगठन भाकियू के नाम पर है। पंजाब और हरियाणा में भी अलग संगठन बनें।
राकेश टिकैत की अगुवाई वाली भारतीय किसान यूनियन टूटेगी, इसकी पटकथा तो किसान आंदोलन के दौरान ही लिखनी शुरू हो गई थी। रही सही कसर उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा के चुनाव और चुनाव के दौरान राकेश टिकैत की अतिसक्रियता के बाद आए परिणामों ने पूरी कर दी।
किसान यूनियन से जुड़े आंदोलनकारियों के मुताबिक अब जब भारतीय किसान यूनियन में टूट के साथ नया संगठन बन गया है, तो न सिर्फ सरकार नए संगठन को तवज्जो देगी, बल्कि उसी संगठन को असली संगठन मान करके आगे भी बढ़ सकती है।
हालांकि राकेश टिकैत के नेतृत्व वाली भारतीय किसान यूनियन का कहना है कि उनका संगठन टूटा नहीं है बल्कि कुछ लोगों को उन्होंने निकाल कर बाहर कर दिया है। फिलहाल भारतीय किसान यूनियन की टूट के साथ संगठन भले अराजनैतिक हो, लेकिन उसका राजनीतिकरण होना पूरी तरीके से तय माना जा रहा है।