बागपत सीएचसी में निरीक्षण करते तहसीलदार अशोक चौधरी।
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बागपत में निवाड़ा गांव की तीन वर्षीय बिटिया गुलनाद की उपचार के अभाव में मौत होने पर स्वास्थ्य विभाग में खलबली मच गई। सोमवार को चिकित्सकों की टीम ने निवाड़ा गांव की झुग्गी झोपड़ी बस्ती में स्वास्थ्य शिविर लगाकर 43 मरीजों का उपचार किया। बुखार से ग्रस्त आठ मरीजों के खून के नमूने लिए गए। इसके अलावा तहसीलदार अशोक चौधरी ने बागपत सीएचसी का निरीक्षण किया।
निवाड़ा गांव की इमराना की बेटी गुलनाद की बागपत जिला अस्पताल में सहीं उपचार न मिलने से मेरठ में मौत हो जाने और वहां से शव को घर पर लाने के लिए सरकारी एंबुलेंस की व्यवस्था न होने की खबर को अमर उजाला ने प्रमुखता से प्रकाशित किया। इससे स्वास्थ्य विभाग में खलबली मच गई। सीएचसी पर तैनात चिकित्सक डाक्टर भुजवीर सिंह (रेडियोलोजिस्ट) के नेतृत्व में स्वास्थ्य कर्मियों ने निवाड़ा गांव की झुग्गी झोपड़ी (मदारियों) की बस्ती में सोमवार को स्वास्थ्य कैंप लगाकर मरीजों की जांच कर निशुल्क दवाई वितरित की।
इस दौरान चिकित्सकों ने 43 मरीजों का उपचार किया। इनमें से बुखार से ग्रस्त 8 मरीजों के रक्त के नमूने लिए गए। चिकित्सकों के मुताबिक कैंप में अधिकतर मरीज खासी, बुखार, एलर्जी से पीड़ित थे। कोई भी रोगी गंभीर बीमारी से ग्रस्त नहीं मिला। चिकित्सकों ने ग्रामीणों को मलेरिया, टाइफाइड एवं डेंगू बुखार की जानकारी दी तथा रोगों के बचाव के बारे में बताया। शिविर में डाक्टर मोहम्मद अहमद, फार्मेसिस्ट अरुण कुमार, स्वास्थ्य कर्मी पूनम त्यागी, आशा खातून मौजूद रही। इसके अलावा बागपत तहसीलदार अशोक कुमार ने सोमवार को शहर की सीएचसी का औचक निरीक्षण किया। इससे वहां पर खलबली मच गई। उन्होंने चिकित्सकों का उपस्थिति रजिस्टर की जांच की।