बिहार के राज्यपाल सत्यपाल मलिक शनिवार को अपने पैतृक गांव हिसावदा आएंगे। ग्रामीण उनके स्वागत समारोह की तैयारियों में जुटे हैं। राज्यपाल बनने के बाद वह पहली बार हिसावदा गांव आ रहे हैं।
मूल रूप से हिसावदा गंाव के रहने वाले सत्यपाल मलिक भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रहे। दो माह पहले ही उन्हें बिहार का राज्यपाल बनाया गया था। किसान परिवार में जन्में सत्यपाल सिंह के पिता बुध सिंह थे।
पिता के निधन के बाद मलिक का पालन पोषण उनकी माता माता जगबीरी कौर ने किया। उनके जीवन पर मां का अधिक प्रभाव रहा। स्वागत समारोह की तैयारी में जुटे भतीजे अमित मलिक, मानवेंद्र मलिक, अमरीश मलिक, मुकेश मलिक ने बताया कि दिल्ली से कार में सवार होकर वह हिसावदा आएंगे। यहां आसपास के गांवों के लोग भी एकत्र होंगे।
छात्र राजनीति से पटना के राजभवन तक
बागपत। राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने वर्ष 1968 में मेरठ कॉलेज मेरठ से छात्र संघ का चुनाव लड़ा और वह मेरठ कॉलेज के पहले अध्यक्ष चुने गए थे। तब वह एलएलबी के अंतिम वर्ष के छात्र थे।
राजनीति में सक्रिय हुए तो पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह से नजदीकियां बढनी शुरू हो गई। बीकेडी के टिकट पर बागपत से वर्ष 1974 से 1977 तक विधायक रहे। दो दिसंबर 1989 से 1991 तक अलीगढ़ से सांसद रहे।
वर्ष 1990 में वह केंद्रीय राज्यमंत्री संसद एवं पर्यटन रहे। वर्ष 1980 से 1986 और इसके बाद बाद वर्ष 1986 से 1992 तक वह उत्तर प्रदेश से राज्यसभा सांसद भी रहे। बीकेडी छोडकर भाजपा में शामिल हुए। राजस्थान के चुनाव की कमान संभाली। यही नहीं वह भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रहे।