सरकार ने कानूनों को रद्द जरूर कर दिया था, लेकिन किसानों की नाराजगी पूरी तरह दूर नहीं हुई थी और अब किसान दोबारा से एमएसपी व पराली समेत कई मामलों को लेकर किसान दोबारा से आंदोलन की तैयारी कर रहे है।
ऐसे में सरकार की यह घोषणा किसानों का रुख नरम पड़ सकता है। वहीं सेना भर्ती में अग्निवीर को लागू करने पर भी सरकार को काफी नाराजगी झेलनी पड़ी थी। वह भी सरकार के इस फैसले से दूर हो सकती है।
जिन राज्यों में जाट बिरादरी, वहां ज्यादा असर पड़ेगा
चौधरी चरण सिंह को भारत रत्न की घोषणा से जाट बिरादरी वाले राज्यों में ज्यादा असर पड़ने की उम्मीद है, जिनमें उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली, पंजाब, उत्तराखंड में सबसे ज्यादा असर होगा तो बिहार, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, जम्मू में भी प्रभाव दिखाई दे सकता है।
राजनीतिक जानकार सुखवीर सिंह गठीना कहते हैं कि चौधरी चरण सिंह किसी एक बिरादरी व वर्ग के नेता नहीं थे। वह भले ही जाट बिरादरी से ताल्लुक रखते हों, लेकिन हर बिरादरी व पार्टी के लोग उनका सम्मान करते थे।
यह जरूर है कि उन्होंने किसानों के हित के लिए ज्यादा कार्य किए और उनको किसान मसीहा माना जाता है। मगर मजदूरों के लिए भी कार्य किए। उनको भारत रत्न देने से सरकार के प्रति नरम रुख जरूर दिखाई देगा।