बड़ौत। नगर की जामा मस्जिद में खिदमत सोसायटी व जमीअत उलमा-ए-हिंद की शुक्रवार को बैठक हुई। जहां इमामों की सुरक्षा के लिए निकाह से पहले दोनों पक्षों को कानूनी शर्तों से संबंधित शपथ पत्र देने का नियम बनाया गया।
खिदमत सोसायटी के अध्यक्ष डॉ. इरफान मलिक ने कहा कि कई बार लोग मस्जिद में निकाह पढ़वा लेते हैं, लेकिन बाद में पता चलता है कि किसी पक्ष का पहले से विवाह हो चुका है या मामला न्यायालय में विचाराधीन है। ऐसी स्थिति में निकाह कराने वाले इमामों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। जमीअत उलमा-ए-हिंद के जिलाध्यक्ष मौलाना आरिफ उल हक ने कहा कि इमाम केवल धार्मिक दायित्व निभाते हैं। उनके पास किसी व्यक्ति के वैवाहिक, कानूनी या अन्य व्यक्तिगत रिकॉर्ड की जानकारी नहीं होती है। बाद में विवाद सामने आता है तो इमाम भी कानूनी कार्रवाई के दायरे में आ जाते हैं। इसलिए निकाह से पहले दोनों पक्षों को शपथ पत्र देना होगा, जिसमें सभी नियम व शर्तें लिखी होनी चाहिए। इस मौके पर मुफ्ती एहसान, मुफ्ती रहीस, मौलाना शाहिद, हाफिज लियाकत, मौलाना गय्यूर, मौलाना अबुल हशन, मास्टर समीर आदि उपस्थित रहे।