जनता वैदिक कॉलेज परिसर में देशखाप चौधरी सुरेंद्र सिंह की रस्म पगड़ी का कार्यक्रम हुआ। उनके बेटे संजीव तोमर को पगड़ी बांधी गई। चौधरी सुरेंद्र सिंह का 30 सितंबर को निधन हो गया था।
बड़ौत नगर के जनता वैदिक कॉलेज परिसर में सोमवार को देशखाप चौरासी चौधरी सुरेंद्र सिंह की रस्म पगड़ी का कार्यक्रम हुआ। पहले यज्ञ किया गया, जिसमें लोगों ने आहुति दी। यज्ञ के बाद बावली थांबा के चौधरी जयपाल सिंह के नेतृत्व में विभिन्न खाप व थांबा चौधरियों ने सुरेंद्र सिंह के बेटे संजीव तोमर को देशखाप चौरासी चौधरी की पगड़ी बांधी।
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हवन में आहुत डालते राकेश टिकैत ओर अन्य।
- फोटो : अमर उजाला
बड़ौत की पट्टी चौधरान के रहने वाले देशखाप चौरासी चौधरी सुरेंद्र सिंह का लीवर के कैंसर के कारण 30 सितंबर को निधन हो गया था। आठ अक्तूबर को उनकी तेरहवीं की गई। सोमवार को नगर के जनता वैदिक कॉलेज परिसर में यज्ञ व रस्म पगड़ी का कार्यक्रम हुआ। सुबह करीब आठ बजे यज्ञ शुरू किया गया। जिसमें केंद्रीय राज्यमंत्री चौधरी जयंत सिंह, सांसद डॉ. राजकुमार सांगवान, सांसद चंदन सिंह चौहान, पूर्व सांसद डॉ. सत्यपाल सिंह, विधायक डॉ. अजय कुमार, प्रसन्न चौधरी, राज्यमंत्री केपी मलिक, पूर्व केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान, भाकियू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश टिकैत, प्रवक्ता राकेश टिकैत समेत थांबा चौधरियों व जनप्रतिनिधियों ने आहुति दी।
हवन के बाद संजीव तोमर को बांधी पगड़ी।
- फोटो : अमर उजाला
इसके बाद बावली थांबा के चौधरी जयपाल सिंह के नेतृत्व में थांबा व खाप चौधरियों ने सामूहिक रूप से देशखाप चौधरी सुरेंद्र सिंह के बड़े बेटे संजीव तोमर को देशखाप चौरासी चौधरी की पगड़ी बांधी। वहीं हाथ उठाकर संकल्प लिया गया कि आज के बाद देशखाप चौरासी चौधरी संजीव तोमर किसी भी मामले में जो भी निर्णय लेंगे, उसका पालन किया जाएगा। जिसका सभी ने समर्थन किया। इसके बाद श्रद्धांजलि सभा की गई। जिसमें लोगों ने शोक प्रकट किया और पीड़ित परिवार की हर संभव मदद करने की बात कही।
इस मौके पर थांबा चौधरी यशपाल सिंह, ब्रजपाल सिंह, देवेंद्र बामनौली, श्याम सिंह चौधरी, गौरव तोमर बड़ौत, चौधरी विवेक चौहान, ब्राह्मण समाज के चौरासी चौधरी सुभाष चंद आदि उपस्थित रहे।
समाज को नई ताकत देती है रस्म पगड़ी की परंपरा: जयंत
चौधरी जयंत सिंह ने कहा कि उनका चौधरी सुरेंद्र सिंह के परिवार से पुराना रिश्ता है। चौधरी सुरेंद्र ने कोई भी निर्णय लिया, उसको समाज के लोगों ने हमेशा माना है। इसका बड़ा कारण यह है कि वह हमेशा सामाजिक फैसले लेते थे, कभी उन्होंने निजी हित में कोई कार्य नहीं किया। उन्होंने कहा कि रस्म पगड़ी की परंपरा समाज को एक नई ताकत देती है।