रजबहे में नहीं छोड़ा जाता पानी
कुछ साल पहले रजबहे के पानी से ही खेतों की सिंचाई की जाती थी। पिछले पांच साल से रजबहे में पानी नही छोड़ा गया है, जिससे किसानों को फसलों की सिंचाई के लिए परेशानी उठानी पड़ती है। पानी के अभाव में किसानों की खेती प्रभावित हो रही है।
- सुंदरपाल
नलकूपों के सहारे कर रहे फसलों की सिंचाई
रजबहे में पानी नही आने के बाद से लोग नलकूपों के भरोसे फसलों की सिंचाई कर रहे है। छोटे और मझले किसानों को नलकूप लगाने में भी दिक्कतें आती है।
- ईश्वर शर्मा
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किसानों को उठानी पड़ रही परेशानी
रजबहे से फसलों की सिंचाई करने वाले किसान दूसरे विकल्पों से सिंचाई करने के लिए विवश है। काफी किसानों को दूर नलकूपों से भी सिंचाई के लिए पानी लाना पड़ता है, जिससे उन्हें दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। - ओमबीर यादव
नलकूप से सिंचाई करने से बढ़ गई लागत
रजबहे में पानी आने से सिंचाई जल्दी हो जाती थी, जबकि नलकूप से सिंचाई करने में अधिक समय लगता है। और खर्चा भी अधिक आता है। नलकूपों से फसलों की सिंचाई करने से फसलों की लागत बढ़ गई है। - नितिन यादव
एक बीघा की सिंचाई के लिए खर्च करने पड़ रहे 150 से 200 रुपये
डीजल इंजन से एक बीघा फसल की सिंचाई करने में एक से डेढ़ घंटे का समय लगता है। इंजन एक घंटे में कम से एक से डेढ़ लीटर डीजल की खपत होती है। इससे किसानों को एक बीघा फसल की सिंचाई के लिए 150 से दो सौ रुपये तक खर्च करने पड़ रहे है। उधर, बिजली के नलकूप से सिंचाई करने के लिए 50 रुपये प्रति घंटा किराया लिया जाता है। किसानों को एक बीघा फसल की सिंचाई के लिए 75 रुपये खर्च करने पड़ रहे है।