अहोई अष्टमी के दिन सिर्फ माताएं ही नहीं, बल्कि पिता भी संतान की सलामती के लिए व्रत रख रहे हैं। कुछ पिता ऐसे भी हैं, जो पत्नी के निधन के बाद बच्चों का लालन-पालन करने में माता व पिता दोनों का फर्ज निभा रहे हैं।
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बड़ौत के रहने वाले सुखपाल की पत्नी बुगली का 2003 में निधन हो गया था। उनके एक बेटा व पांच बेटियां हैं। इसके बाद से ही सुखपाल बच्चों के पालन-पोषण में माता व पिता दोनों का फर्ज निभाते आ रहे हैं। वह अहोई पर निर्जला व्रत रखते हैं और अपने बच्चों की सलामती के लिए अहोई माता की महिलाओं की तरह विधि-विधान से पूजा करते हैं। सुखपाल का कहना है कि निर्जला व्रत रखने से भगवान शिव और माता पार्वती प्रसन्न होती हैं और अनहोनी को टालकर संतान को दीर्घायु प्रदान करते हैं। इसके साथ ही घर में सुख समृद्धि लाती हैं।
शहर के शांतिनगर मोहल्ला निवासी ओमवीर की पत्नी शशि का 10 साल पहले निधन हो गया था। उनको दो बेटे व एक बेटी है। तभी से ओमवीर अपने बच्चों की लंबी आयु के लिए अहोई माता का व्रत रखते हैं। ओमवीर का कहना है कि सच्चे मन से माता की आराधना करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं। उनके बच्चों की आयु लंबी हो और उनको कोई कष्ट नहीं हो, बस वह यही कामना करते हैं।