दरअसल, मलकपुर चीनी मिल पर वर्तमान सत्र का 38 हजार किसानों का 333 करोड़ रुपये बकाया हो गया है। हर बार अगला सत्र शुरू होने पर ही पिछले सत्र का भुगतान हो पाता था। इस बार ऐसा होगा कि उसी सत्र में भुगतान शुरू हो जाएगा। यह प्रसास सफल रहा तो दो दशक बाद किसानों पर गन्ना भुगतान होने पर होली का रंग चढ़ेगा।
इन मिलों पर 221 करोड़ बकाया भुगतानवर्तमान सत्र का सहकारी चीनी मिल बागपत पर 20.22 करोड़, रमाला मिल पर 38.57 करोड़, किनौनी चीनी मिल पर 156.39 करोड़, दौराला मिल पर चार करोड़, तितावी मिल पर 8.69 करोड़ रुपये गन्ना भुगतान बकाया है। खतौली मिल पर 16.37 करोड़, मंसूरपुर मिल पर 1.32 करोड़, ऊन मिल पर 17.68 करोड़ तथा मोदीनगर मिल पर 20.11 करोड़ रुपये बकाया है। यह गन्ना भुगतान नहीं मिलने से हजारों किसानों को आर्थिक समस्याओं को सामना करना पड़ रहा है।
अब बैंक दबाकर नहीं बैठेंगे गन्ना भुगतान
प्रशासन को किसानो से शिकायत मिल रही थी कि चीनी मिलों से गन्न्ना भुगतान के रुपये बैंकों को भेज दिए जाते हैं। मगर, बैंक अधिकारी गन्ना भुगतान के रुपये आठ-दस दिन तक किसानों के खातों में ट्रांसफर नहीं करते।
डीसीओ ने बताया कि डीएम ने सभी बैंक अधिकारयों को पत्र भेजकर निर्देश दिया कि चीनी मिलों से भुगतान मिलते ही तत्काल उसे किसानों के खाते में ट्रांसफर किया जाए।
प्रयास किया जा रहा कि होली से पहले गन्ना भुगतान कराया जाए। मलकपुर चीनी मिल प्रबंधन से बात हो गई है, इसलिए वर्तमान सत्र का गन्ना भुगतान होली से पहले शुरू होने की उम्मीद है। मलकपुर के अलावा दूसरी मिलों के प्रबंधन पर भी गन्ना भुगतान में तेजी लाने के लिए दबाव बनाया जा रहा है। अमर प्रताप सिंह, जिला गन्ना अधिकारी