बागपत के जागोस गांव के जंगल में नलकूप पर 25 मई 2021 को लोहे की रॉड और डंडों से पीटकर विकास शर्मा की हत्या की गई थी। जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने चारों पर 28-28 हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया है।
जिला एवं सत्र न्यायाधीश मनोज कुमार ने जागोस गांव के ईंट भट्ठा मुनीम विकास शर्मा के हत्यारे राजू धनकड़ निवासी फैजपुर निनाना, उसके फुफेरे भाई संदीप उर्फ कल्लू, दोस्त बिल्लू उर्फ ओमवीर निवासी आदर्श नंगला और संजू उर्फ संजीव निवासी मलकपुर को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही चारों पर 28-28 हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया। जिसे अदा नहीं करने पर एक साल की सजा बढ़ाई जाएगी।
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जागोस गांव निवासी अशोक कुमार ने 25 मई 2021 में छपरौली थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया कि उसके बड़े भाई विकास शर्मा खेड़ा इस्लामपुर गांव के ईंट भट्ठे पर मुनीम थे। 24 मई को अपने खेत में गए तो वहां पर चार युवक बैठे हुए मिले।
विकास ने चारों को नलकूप पर शराब पीने और पानी गंदा करने से मना किया तो उन्होंने गाली-गलौज करते हुए लाठी-डंडों और लोहे की रॉड से हमला कर दिया। शोर सुनकर उसका भाई आशीष, सोनू, मजदूर तौफीक समेत अन्य वहां पहुंचे तो हमलावर राजू धनकड़, उसका फुफेरा भाई संदीप उर्फ कल्लू, संजू उर्फ संजीव और एक अज्ञात युवक जान से मारने की धमकी देकर भाग गए।
घायल विकास को बड़ौत के निजी अस्पताल से मेरठ रेफर कर दिया, जहां घटना के दो दिन बाद उपचार के दौरान विकास की मौत हो गई। पुलिस ने मामला हत्या की धारा में तरमीम कर दिया। जांच में बिल्लू का नाम प्रकाश में आया। पुलिस ने राजू धनकड़, उसके फुफेरे भाई संदीप, दोस्त बिल्लू, संजू को गिरफ्तार कर जेल भेजने के बाद न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल कर दिया।
मंगलवार को सजा पर सुनवाई शुरू हुई तो वादी पक्ष के अधिवक्ता जसपाल राणा ने हत्यारों को फांसी की सजा की मांग की। सुनवाई पूरी होने पर जिला एवं सत्र न्यायाधीश मनोज कुमार ने चारों पर दोषसिद्ध कर आजीवन कारावास की सजा सुनाई और 28-28 हजार रुपये अर्थदंड लगाया।
हत्या की धमकी मिली, पैरवी पर डटे रहे परिजन
जिला एवं सत्र न्यायालय में विकास के हत्यारों को सजा सुनाई जाने के बाद अशोक कुमार ने कहा कि जेल से जमानत पर बाहर आने के बाद चारों ने उनके परिवार पर कई बार समझौता करने का दबाव बनाया। समझौते से मना करने पर उनके परिवार वालों को हत्या की धमकी दी गई। इसके बाद गवाहों को भी धमकाया गया, लेकिन उनके परिवार वाले और गवाह पीछे नहीं हटे, जो सजा दिलाने के लिए डटे रहे। इस मामले में 10 गवाहों ने गवाही दी, जिसके आधार पर हत्यारों को सजा सुनाई गई।