पहले वुशू खेला, चोट लगी तो शूटिंग की शुरू
अखिल के पिता रविंद्र श्योराण बताते है कि स्कूल में अखिल की खेलों में रूचि को देखते हुए वुशू खिलाना शुरू कर दिया गया। जिसमें वह अच्छा खेलने लगा, लेकिन उसकी सीनियर खिलाड़ी से भिड़ंत करा दी गई, जिससे उसको चोट लग गई। उसके बाद उसने वुशू खेलने से मना कर दिया तो उसे राइफल शूटिंग शुरू कराई गई।
अखिल ने विदेशी धरती पर पदक जीतकर लगाया अंबार
अखिल श्योराण ने वर्ष 2014 में आईएसएसएफ वर्ल्ड शूटिंग चैंपियनशिप स्पेन में कांस्य पदक, वर्ष 2015 में आईएसएसएफ जूनियर वर्ल्ड कप जर्मनी में कांस्य पदक, एशियन शूटिंग चैंपियनशिप कुवैत में एक स्वर्ण, तीन रजत पदक, एयरगन शूटिंग चैंपियनशिप दिल्ली में एक रजत पदक जीता।
इसके अलावा वर्ष 2016 में वर्ल्ड यूनिवर्सिटी चैंपियनशिप पोलैंड में दो स्वर्ण पदक, वर्ष 2017 में अंतर्राष्ट्रीय शूटिंग कंपटीशन में जर्मनी में कांस्य पदक, वर्ष 2018 में आईएसएसएफ वर्ल्ड कप मेक्सिको में स्वर्ण पदक, वर्ल्ड यूनिवर्सिटी मलेशिया में एक कांस्य पदक, वर्ष 2019 में साउथ एशिया गेम्स काठमांडू नेपाल में रजत पदक, वर्ष 2022 में आईएसएसएफ वर्ल्ड कप में कांस्य, वर्ष 2023 में वर्ल्ड चैंपियनशिप में एक स्वर्ण और एक रजत जीते हैं।
खेल के साथ पढ़ाई में अव्वल रहा अखिल
पिता रविंद्र ने बताया कि अखिल ने 12वीं में 81 प्रतिशत अंक प्राप्त किए थे। उसके बाद वह वर्ष 2012 में दिल्ली में हंसराज कालेज में बीए की पढ़ाई करने गया और उसके बाद जामिया इस्लामिया से एमबीए किया। वह पढ़ाई में हमेशा अव्वल रहा है और उसने खेल के साथ पढ़ाई भी अच्छे से की।
पिता से किया था वादा, देश को मेडल दिलाएंगे
अखिल से पिता रविंद्र की एक दिन पहले ही बात हुई थी। तब अखिल ने पिता से वादा किया था कि वह एशियन गेम्स में देश को मेडल जरूर दिलाएंगे। अखिल ने पिता से किया वादा भी पूरा किया। अखिल के मेडल जीतने से जहां परिवार व गांव में खुशी का माहौल है, वहीं रेलवे के अधिकारी भी खुश है।