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बागपत: कोरोना काल में मांग घटते ही कम हुआ फूलों का रकबा, किसानों ने भी मुंह मोड़ा

Sun, 18 Oct 2020 12:18 AM IST
मेरठ ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बागपत

सार

- पिछले साल के सापेक्ष इस बार सात हेक्टेयर जमीन पर कम हुई खेती
- मार्च महीने में कोरोना के कारण गुलाब की खेती में हुआ था घाटा
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गेंदे की खेती का फाइल फोटो - फोटो : BAGHPAT
कोरोना संक्रमण काल ने फूलों की खेती करने वाले किसानों को प्रभावित किया है। लॉकडाउन में नुकसान झेल चुके किसान दोबारा से रिस्क लेने के मूड में नहीं हैं। यही वजह है कि पिछले साल फूलों का रकबा बागपत जिले में 65 हेक्टेयर क्षेत्र में था, जबकि इस बार सिमटकर यह 58 हेक्टेयर तक रह गया है। इसकी वजह है फूलों की मांग कम होना।
 
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floriculture, lockdown meerut - फोटो : amar ujala
इसलिए घट गई फूलों की मांग
बागपत जिला उद्यान अधिकारी दिनेश कुमार अरुण ने बताया कि कोरोना काल में शादी विवाह और अन्य समारोह नहीं हुए। सार्वजनिक कार्यक्रम भी नहीं हो सके। शिक्षण संस्थाएं बंद रहीं, जिस कारण फूलों की मांग घट गई। किसानों को सीधा नुकसान हुआ।
 
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Floriculture, गुलाब की खेती - फोटो : amar ujala
चार राज्यों में सप्लाई
फूलों की खेती में पहले स्थान पर गेंदा और दूसरे स्थान पर गुलाब की खेती की जाती है। इनके अलावा तीसरे स्थान पर गलेड़ी व चौथे स्थान पर रजनीगंधा की खेती की जाती है। जिले के किसान हरियाणा, उत्तराखंड और दिल्ली के अलावा आसपास के जिलों में भी फूलों की सप्लाई करते थे। लोनी, मेरठ और गाजियाबाद में फूलों की मांग रहती थी।

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floriculture - फोटो : amar ujala
फूलों की खेती का रकबा (हेक्टेयर में)
फूल वर्तमान पिछले साल
गेंदा 20 23
गुलाब 13 15
गलेड़ी 15 16
रजनीगंधा 10 11
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Floriculture, गुलाब की खेती - फोटो : amar ujala
गुलाब की खेती करने वाले किसान सुधीर खोखर का कहना है कि कोरोना के कारण लगे लॉकडाउन में लाखों रुपये कीमत के गुलाब उखाड़कर फेंकने पड़ गए थे। इसके अलावा प्लास्टिक पर बैन होने के बावजूद बाजार में बनावटी फूल मौजूद हैं। सरकार को बनावटी फूलों पर रोक लगानी चाहिए।

फूलों की खेती से लाभ ही लाभ
छपरौली के एडीओ कृषि महेश खोखर का कहना है कि फूलों की खेती से किसानों को फायदा ही फायदा है।
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