संवाद न्यूज एजेंसी
बागपत। पुराने कस्बे के कुरैशियान मोहल्ले में अवैध कमेला पकड़े जाने के बाद कई खुलासे हो रहे है। पहला यह कि पशुओं को हरियाणा से तस्करी करके लाया जाता था। ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस वे से कस्बे तक पशुओं को लेकर आने में पुलिस ही तस्करों की मददगार बनती थी। यहीं नहीं, कटान करके मीट को लेकर जाने के लिए भी पुलिस मदद करती थी। इनमें वह पुलिस वाले संदेह के घेरे में आए है, जिनकी ड्यूटी ईपीई के आसपास रहती है।
हरियाणा के हिसार और फतेहाबाद से सबसे ज्यादा पशुओं को तस्करी करके बागपत लाया जाता है। ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस वे के रास्ते ही पशुओं की तस्करी हो रही है। इसीलिए पुलिस पर सबसे ज्यादा सवाल उठ रहे है कि ईपीई से लेकर कस्बे तक कई जगह पुलिस रहती है, इसके बावजूद पशु कैसे पहुंचते थे। पुलिस सूत्रों के अनुसार अवैध कमेले से पकड़े गए एक आरोपी ने पूरा खुलासा किया है कि पुलिस ही पशुओं को लेकर आने में मदद करती थी। मीट लेकर जाने में भी पुलिस कर्मी ही रास्ता साफ होने की बात बताते थे। यह भी बताया गया है कि कस्बे में करीब 100 छोटे कटड़े रोजाना काटे जा रहे थे। अब इसको बढ़ाने की तैयारी हो गई थी। हालांकि अब आरोपियों को जमानत मिल चुकी है और पुलिस के लिए पशुओं की तस्करी व अवैध पशु कटान रोकना दोबारा से बड़ी चुनौती होगी।
यह भी पता लगाया जाएगा कि आखिर पशुओं को यहां कैसे लेकर आते थे और इसमें मदद करने वाला कौन था। इसमें जितने भी लोग शामिल होंगे, उन पर कार्रवाई की जाएगी। अवैध पशु तस्करी व कटान किसी भी हालत में नहीं होने दिया जाएगा। अनुज मिश्रा, सीओ बागपत