पढ़ना चाहती है बेटियां
गांव में आठवीं के बाद स्कूल नहीं है। परिवार वाले गांव के बाहर पढ़ाई कराने के लिए तैयार नहीं है। इस कारण बीच में ही पढ़ाई छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा। - फरमीना
आठवीं के बाद पढ़ाई करने के लिए छपरौली जाना पड़ता है, जो गांव के नौ किलोमीटर दूर है। मजबूरन पढ़ाई छोड़नी पड़ती है। - रुबीना
छपरौली जाने के लिए कोई साधन भी नहीं है। गांव के लोगों को छपरौली जाने के लिए डग्गामार वाहनों का सहारा लेना पड़ता है। परिवार वाले अकेले भी नहीं भेजना चाहते है, जिससे आठवीं के बाद पढ़ाई छोड़नी पड़ी। - फरहीन
आठवीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद आगे पढ़ना चाहती थी, मगर आगे की पढ़ाई के लिए छपरौली जाना पड़ता। विद्यालय दूर होने के कारण पढ़ाई छोड़नी पड़ी। - नर्गिस
मजदूरी पर आश्रित है गांव के लोग
गांव के अधिकांश लोग मजदूरी पर आश्रित है। गांव में आठवीं के बाद सरकारी स्कूल न होने के कारण बेटियों की पढ़ाई छूट रही है। गांव से छपरौली के लिए यातायात व्यवस्था भी सही नहीं है। लोग बेटियों को गांव से दूर पढ़ाई करने के लिए भेजने से डरते हैं। - मोहम्मद नवाजिश खान, ग्राम प्रधान
टांडा में राजकीय मॉडल कन्या इंटर कॉलेज का निर्माण शुरू कराने के लिए तीन करोड़ 85 लाख रुपये के बजट का प्रस्ताव तैयार किया गया था। शासन स्तर से तीन करोड़ 15 लाख रुपये की स्वीकृति मिली। बजट के अभाव में कॉलेज का निर्माण बीच में ही अटक गया। अगर बजट मिलता है तो उसका निर्माण पूरा कराकर शुरू करा दिया जाएगा। - मोहम्मद तारीक, जिला अल्पसंख्यक अधिकारी