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उत्तर प्रदेश में एक गांव ऐसा भी: आठवीं के बाद पढ़ाई छोड़ रहीं बेटियां, जानिए क्या है बड़ी वजह

Wed, 23 Feb 2022 05:35 PM IST
कपिल kapil अनिल भारद्वाज, संवाद न्यूज एजेंसी, बागपत

सार

उत्तर प्रदेश के बागपत जनपद में एक गांव ऐसा भी है, जहां बेटियां आठवीं के बाद ही पढ़ाई छोड़ रहीं हैं। जानिए आखिर इसके पीछे क्या बड़ी वजह है।
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टांडा में निर्माणाधीन राजकीय मॉडल कन्या इंटर कॉलेज। - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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बागपत जनपद के टांडा गांव की बेटियों को पढ़ाई के लिए नौ किलोमीटर दूर छपरौली ना जाना पड़े, इसके लिए छह साल पहले क्षेत्र में ही मॉडल राजकीय कन्या इंटर कॉलेज का निर्माण शुरू हुआ था। मगर, बजट के अभाव में यह आज तक पूरा नहीं हो सका है। यहीं वजह है कि बेटियां आठवीं के बाद ही पढ़ाई छोड़ रही हैं। कारण है कि परिवार वाले बेटियों को छपरौली पढ़ने नहीं भेजते हैं। इसलिए मजबूरन पढ़ाई छोड़नी पड़ रही है। ऐसी बेटियों की लंबी कतार है। 

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अल्पसंख्यक विभाग की ओर से छात्राओं को आठवीं के बाद पढ़ाई के लिए टांडा गांव में वर्ष 2016 में मॉडल कन्या इंटर कॉलेज का निर्माण शुरू कराया गया था। इससे लोगों को उम्मीद जगी कि अब उनकी बेटियां भी आठवीं के बाद गांव में ही पढ़ाई कर सकेंगी। गांव से नौ किलोमीटर दूर छपरौली में इंटर कॉलेज है। परिवार वाले अपनी बेटियों को डर के कारण भेजते नहीं है। उस वक्त कॉलेज के निर्माण के लिए तीन करोड़ 85 लाख रुपये का प्रस्ताव तैयार किया गया था, लेकिन शासन से तीन करोड़ 15 लाख रुपये की ही स्वीकृति मिली। छह साल बीतने के बाद भी कॉलेज का निर्माण अधूरा है। भवन का निर्माण पूरा हो चुका है, लेकिन फिनिशिंग और फर्नीचर का काम होने पर स्टाफ की तैनाती करके ही कॉलेज को शुरू कराया जा सकता है। 

पढ़ाई छोड़ने को मजबूर बेटियां 
बेटियों को आठवीं से आगे की पढ़ाई करने के लिए नौ किलोमीटर दूर छपरौली कस्बा जाना पड़ता है। कॉलेज दूर होने के कारण बेटियों को आगे की पढ़ाई नहीं करा पाते है। - मोहम्मद शाबिर अब्बासी, अभिभावक 
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बेटी को अकेले भेजने में लगता हैं डर 
गांव में आठवीं के बाद स्कूल नहीं है। बेटियों को गांव से बाहर पढ़ाई करने के लिए भेजने में डर लगता है। गांव में ही आठवीं के बाद बेटियों को पढ़ाने की व्यवस्था होगी तो उनको जरूर पढ़ाएंगे। - फारूक त्यागी, अभिभावक 

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पढ़ना चाहती है बेटियां
गांव में आठवीं के बाद स्कूल नहीं है। परिवार वाले गांव के बाहर पढ़ाई कराने के लिए तैयार नहीं है। इस कारण बीच में ही पढ़ाई छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा। - फरमीना

आठवीं के बाद पढ़ाई करने के लिए छपरौली जाना पड़ता है, जो गांव के नौ किलोमीटर दूर है। मजबूरन पढ़ाई छोड़नी पड़ती है। - रुबीना
 
छपरौली जाने के लिए कोई साधन भी नहीं है। गांव के लोगों को छपरौली जाने के लिए डग्गामार वाहनों का सहारा लेना पड़ता है। परिवार वाले अकेले भी नहीं भेजना चाहते है, जिससे आठवीं के बाद पढ़ाई छोड़नी पड़ी। - फरहीन

आठवीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद आगे पढ़ना चाहती थी, मगर आगे की पढ़ाई के लिए छपरौली जाना पड़ता। विद्यालय दूर होने के कारण पढ़ाई छोड़नी पड़ी। - नर्गिस 

मजदूरी पर आश्रित है गांव के लोग 
गांव के अधिकांश लोग मजदूरी पर आश्रित है। गांव में आठवीं के बाद सरकारी स्कूल न होने के कारण बेटियों की पढ़ाई छूट रही है। गांव से छपरौली के लिए यातायात व्यवस्था भी सही नहीं है। लोग बेटियों को गांव से दूर पढ़ाई करने के लिए भेजने से डरते हैं। - मोहम्मद नवाजिश खान, ग्राम प्रधान 

टांडा में राजकीय मॉडल कन्या इंटर कॉलेज का निर्माण शुरू कराने के लिए तीन करोड़ 85 लाख रुपये के बजट का प्रस्ताव तैयार किया गया था। शासन स्तर से तीन करोड़ 15 लाख रुपये की स्वीकृति मिली। बजट के अभाव में कॉलेज का निर्माण बीच में ही अटक गया। अगर बजट मिलता है तो उसका निर्माण पूरा कराकर शुरू करा दिया जाएगा। - मोहम्मद तारीक, जिला अल्पसंख्यक अधिकारी
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