कोरोना के कारण दो साल तक स्कूल बंद रहे और परीक्षाएं भी नहीं कराई गई। अब स्कूल खुलने पर परीक्षा शुरू होने पर विद्यार्थियों के चेहरे खिल गए। छात्रों का कहना है कि परीक्षा न होने का सबसे अधिक नुकसान बेहतर तैयारी करने वाले छात्रों को हुआ। छात्रों को उनकी परीक्षा के आधार पर अंक नही मिले सके, जिसके कारण उनके हाथ मायूसी लगी। स्कूल बंद होने से दो साल तक छात्रों को बिना परीक्षा के अगली कक्षाओं में प्रोन्नत किया गया।