संवाद न्यूज एजेंसी
अग्रवाल मंडी टटीरी। रमजान मुबारक माह में अल्लाह जन्नत के दरवाजे खोल देते हैं। रोजेदारों का रोजा खराब न हो इसके लिए तमाम शैतानों को कैद कर लिया जाता है। इंसान को उसके अच्छे-बुरे कर्मों का फल जरूर मिलता है। इंसान का अच्छा और बुरा कर्म उसकी कब्र में महफूज रहता है।
मौलवी हाजी जहीर अहमद ने कहा कि अल्लाह ने रमजान के महीने को बाकी 11 महीनों पर बुजुर्ग अता की है। इसी तरह हजरत मोहम्मद साहब को तमाम नबियों पर कुरान शरीफ को तमाम आसमानी किताबों पर हज के दिन को साल के तमाम दिनों पर बुजुर्गों अता फरमाए हैं। रमजान मुबारक के शुरू होते ही जन्नत को सजाना शुरू कर दिया जाता है। रमजान की पहली रात आते ही अल्लाह जन्नत के दरवाजे खोल देते हैं। जहन्नुम के दरवाजे अपने महबूब की उम्मीदों के लिए बंद कर देते हैं। उन्होंने मुस्लिमों से रमजान मुबारक माह में नवाज के साथ-साथ तरावीह पढ़ने का आह्वान किया। दुनिया में रहकर जो कुछ अच्छा या बुरा काम करता है वह उसकी कब्र में महफूज रहता है। इंसान को अपने किए का हिसाब चुकाना पड़ता है। इंसान के साथ मरने के बाद कब्र तक तीन चीजें साथ जाती हैं। पहले रिश्तेदार फिर उसके आमाल और तीसरा उसका वह माल जो उसने अपनी जिंदगी में अल्लाह के रास्ते में खर्च किया या जो गरीबों व बेसहारा की मदद की। रिश्तेदार तो इंसान को दफना कर चले आते हैं जबकि आमाल उसके साथ रह जाता है। अल्लाह ताला इंसान को अच्छे काम करने के लिए भेजते हैं लेकिन आज इंसान अच्छे कामों की तरफ कम और बुरे कामों की तरफ ज्यादा जा रहा है। मरने के बाद इंसान को हर किए गए कर्मो का हिसाब चुकाना पड़ता है। इसलिए दुनिया में रहकर अच्छे काम करने चाहिए।