बागपत। औषधि निरीक्षक को एक नकली दवा बनाने वाली कंपनी का पता लगाने में एक वर्ष से अधिक का समय लग गया। मार्च 2017 में एक एंटीबायोटिक दवा के नमूना लिया गया था। अब इस मामले में उत्तराखंड के रुड़की स्थित तीन कंपनियों के महिला सहित चार पदाधिकारियों के खिलाफ न्यायालय में वाद दायर कराया है।
ड्रग्स इंस्पेक्टर वैभव बब्बर ने बताया कि मार्च 2017 में अमीनगर सराय के सागर मेडिकल स्टोर से एक एंटीबायोटिक दवा का नमूना लिया था। इसे जांच के लिए लखनऊ प्रयोगशाला भेजा गया था। डेढ़ वर्ष पूर्व नमूने की रिपोर्ट आई, जिसमें राजकीय प्रयोगशाला में दवा में मौजूद ऑफ्लोक्सिन की मात्रा केवल 0.090 प्रतिशत ही पाई गई, जोकि गलत है। इसके बाद विवेचना की गई तीन राज्यों से इसके तार जुडे़ मिले। अमीनगर सराय के मेडिकल स्टोर संचालक ने यह दवा दिल्ली से खरीदी। वहां जांच की गई तो पता चला कि दवा हरियाणा के पानीपत जनपद से ली गई। इसके बाद पानीपत में जांच की गई तो दवा रुड़की की एक कंपनी से खरीदना बताया गया। रुड़की में जांच पड़ताल की गई तो झोल ही झोल मिला। इस बारे में पूछताछ की गई तो संचालकों ने कंपनी में दवा न बनने की बात कही। विवेचना में सामने आया कि ज्योति केमिकल्स, पूरिस्तो फार्मा, अर्थ फार्मा द्वारा षड्यंत्र रच कर इस दवा का निर्माण कर बेचा गया है।
ड्रग्स इंस्पेक्टर ने बताया कि ज्योति केमिकल की प्रोपराइटर ज्योति शर्मा, ऑथराइज्ड सिग्नेटरी सचिन शर्मा, पूरिस्टो फार्मा के प्रोपराइटर मनीष कौशिक एवं अर्थ फार्मा के प्रोपराइटर पीयूष शर्मा को औषधि के निर्माण एवं क्रय-विक्रय में सम्मलित पाते हुए चारों के विरुद्ध न्यायालय मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट जनपद बागपत में वाद दायर किया गया है। बताया कि अगर दोषी पाए जाते है तो औषधि के निर्माण एवं क्रय विक्रय करने के आरोप में इन सभी के विरुद्ध 10 लाख रुपये का अर्थदंड और उम्र कैद तक की सजा हो सकती है।