बड़ौत में धर्मसभा में बोलते गुप्ति सागर महाराज।
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व्यक्ति जीवन भर पाप-पुण्य के लेखा-जोखा में लगा रहता है : गुप्ति सागर महाराज
बड़ौत। इंसान जिंदगी भर पाप-पुण्य, बेईमानी, अत्याचार की जुगबंदी से घिरा रहता है। यह बात गुप्ति सागर महाराज ने रविवार को दिगंबर जैन अतिथि भवन में आयोजित धर्मसभा में कहीं। इस दौरान धर्मसभा का शुभारंभ मंगलाचरण से किया गया।
उपाध्याय महाराज ने कहा कि इंसान जिंदगी भर नीति, अनीति, पाप-पुण्य, विवेक, बेईमानी, अत्याचार, भ्रष्टाचार, अहंकार, निंदा, चुगली, मिलावटखोरी आदि कर धन कमाता है। लेकिन जब मरता है तो सबकुछ यही छोड़ कर चला जाता है। इस सच्चाई, हकीकत से वह वाकिफ रहता है लेकिन मानता नही है! जीता अपनों के लिए है पर मरने के बाद दूसरे के कंधों पर सवार होकर निकलता है। फिर गर्व से कहता है- हम भी गुस्ताखी करेंगे जीवन में एक बार जब लोग पैदल चलेंगे और हम होंगे कंधों पर सवार। आदमी की औकात बस एक मुट्ठी राख की है। जब गया सिकंदर तो दोनों हाथ खाली थे जब विश्व को जीतने वाला सम्राट सिकंदर भी खाली हाथ गया तो हम किस खेत की मूली है। उपाध्याय ने कहा कि इंसान मेरा मेरा करता रहता है पर उसका है कुछ नही जिस दिन मौत की शहजादी आएगी उस दिन बेटा बेटी, पत्नी, भाई, पिता सब रिश्ते घर की दहलीज से श्मशान तक रहेंगे। साथ जाएगा तो सिर्फ आपका धर्म और कर्म। इसलिए धर्म करो माता-पिता की सेवा करो, साधु संतों की सेवा करो। धर्मसभा का संचालन अमित ने किया। इस दौरान पंकज अनिल अजय प्रवीण गौरव नितिन सिद्धार्थ विनोद मोनिका दीपा कृष्णा अंजू पूनम पिंकी कौशल शालनी आदिश आदि मौजूद रहे। अतिथि भवन में मंगलाचार के तहत भगवान के माता-पिता बनने वाले श्रीमती कृष्णा जैन व श्री अशोक जैन की ओर से भगवान की आराधना भक्ति की गई।