बड़ौत (बागपत)। दिल्ली विश्वविद्यालय के 80 छात्र-छात्राओं के प्रतिनिधिमंडल ने सिनौली, बरनावा और बड़ौत के शहजाद राय शोध संस्थान का दौरा किया। निदेशक अमित राय जैन ने शोधार्थियों को शोध के विषय में जानकारी दी। डीयू के पांच छात्र शहजाद राय शोध संस्थान में रखे पुरावशेष पर पीएचडी करेंगे।
शोध छात्र मंगलवार को सिनौली गांव में पहुंचे। यहां उत्खनन साइट के इंचार्ज विनय कुमार ने छात्रों के दल को अब तक यहां मिले पुरावशेष और इनके महत्व के विषय में जानकारी दी। स्थानक मंडी में शहजाद राय शोध संस्थान के निदेशक डॉ. अमित राय जैन की ओर से लगाई गई पुरावशेष की प्रदर्शनी का अवलोकन किया। छात्रों ने शोध के इच्छा जताई, जिस पर डॉ. अमित राय जैन ने सहमति जताई। प्रदर्शनी में ताम्र युगेन शस्त्र और आभूषण, पांच हजार वर्ष पुराने टेराकोटा की आकृतियां मातृ देवी मृण मूर्ति व अन्य पुरावशेषों की जानकारी ली।
सिनौली में उत्खनन कार्य जारी
बड़ौत। पुरातत्व विभाग की ओर से सिनौली में उत्खनन कार्य जारी रहा। दिल्ली यूनिवर्सिटी के अलावा आसपास के लोग भी उत्खनन देखने पहुंच रहे हैं। किसान श्रीराम के खेत में उत्खनन कार्य चल रहा है। अब तक यहां पर ईंटों की विशाल दीवार, दुर्लभ पॉटरी के साथ-साथ एक ट्रेंच से मानव कंकाल प्राप्त हुआ, यह महिला का कंकाल है और इसके कानों से स्वर्ण आभूषण भी प्राप्त हुए है। इस महिला को बाहर निकालते हुए टीम को एक शाही ताबूत भी मिल चुका है।
बरनावा में जाना महाभारत का इतिहास
बिनौली। संस्कृत महाविद्यालय गुरुकुल लाक्षाग्रह बरनावा पर मंगलवार को दिल्ली विश्वविद्यालय से संबद्ध सत्यवती कॉलेज दिल्ली के इतिहास आनर्स के छात्र व छात्राओं का दल पहुंचा और यहां पर छात्र एवं छात्राओं ने महाभारत कालीन अवशेष देखे।
सत्यवती कॉलेज दिल्ली के इतिहास विभागाध्यक्ष डॉ. राजीव कुमार वर्मा के नेतृत्व में डॉ. शशिभूषण सिंह, डॉ. जगवीर सिंह, डॉ. प्रेमशंकर सिंह, डॉ. पूरन लाल मीणा आदि शिक्षकों और छात्रसंघ के अध्यक्ष रोहित सिंह, कृतिका, दीक्षा, साहिल राज, शक्ति आदि के साथ इतिहास आनर्स के प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय वर्ष के 80 छात्र छात्राओं ने बरनावा लाक्षागृह पर भ्रमण किया। इस दौरान उन्होंने पुरातत्व अवशेष देखे। गुरुकुलीय व्यवस्था को जाना समझा और गुरुकुल के ब्रह्मचारियों के साथ भोजन किया। इस दौरान प्रधानाचार्य आचार्य विनोद कुमार ने छात्र छात्राओं को लाक्षागृह का इतिहास बताया तथा ब्रह्मलीन कृष्णदत्त महाराज के प्रवचनों पर आधारित साहित्य की भी जानकारी दी।