दोघट (बागपत)। क्षेत्र में राजकीय नलकूपों को नियमित रूप से चलाने के लिए 1965 में दाहा में सिंचाई विभाग ने निरीक्षण भवन बनाया और यहीं पर ही नलकूपों के संचालन के लिए कार्यशाला खोली, लेकिन विभागीय अफसरों की उपेक्षा के कारण वर्तमान समय में निरीक्षण भवन जर्जर हालत में पहुंच गया है और कई नलकूप ठप पड़े हैं। इससे क्षेत्रीय किसानों को फसल की सिंचाई करने में परेशानी हो रही है। इससे किसानों में विभागीय अफसरों और सरकार के खिलाफ गुस्सा पनप रहा है।
विभागीय सूत्रों के अनुसार चौगामा क्षेत्र में 72 राजकीय नलकूपों में से 57 नलकूप ही चालू हैं। दाहा ग्रुप में एक भी मकैनिक नहीं है। जबकि यहां पांच मकैनिक रहते थे और खराब नलकूपों को ठीक करते थे। ग्रामीणों का आरोप है कि दो अवर अभियंता है, जो कभी-कभी आते हैं। नलकूप ऑपरेटरों की संख्या भी घटती जा रही है। नलकूपों के खराब मोटरों को ठीक कराने के लिए यांत्रिक शाखा मेरठ पहुंचाना पड़ता है और मोटर ठीक होकर आने में एक माह का समय लगता है। इस कारण संबंधित किसानों को अपनी फसल को बचाने के लिए स्वयं ही मोटर को ठीक कराना पड़ता है।
किसान संजीव राणा ने बताया सिंचाई विभाग के अफसर राजकीय नलकूपों की उपेक्षा कर रहे हैं। इस कारण नलकूपों का किसानों को लाभ नहीं मिल पा रहा है। इससे किसानों में विभागीय अफसरों के खिलाफ गुस्सा पनप रहा है। किसान कभी भी अफसरों के खिलाफ आंदोलन शुरू कर सकते हैं। किसान महक सिंह, किसान संजय, रामपाल सिंह ने कहा सरकार को नलकूपों के संचालन पर ध्यान देना चाहिए। यदि सरकार ने नलकूपों के संचालन को गंभीरता से नहीं लिया तो किसानों का गुस्सा आंदोलन का रूप ले सकता है।
दूसरी तरफ नलकूप खंड (पश्चिम) के अधिशासी अभियंता योगेंद्र सिंह ने बताया दाहा ग्रुप में मैकेनिक उपलब्ध कराने के लिए कई बार शासन को पत्र लिखा जा चुका है, लेकिन अभी तक एक भी मैकेनिक नहीं मिला है। इससे परेशानी हो रही है। उन्होंने बताया प्राइवेट लोगों की मदद से काम चलाया जा रहा है। उन्होंने बताया विभाग के निरीक्षण भवन की मरम्मत और रखरखाव के लिए पहले बजट मिलता था, लेकिन पिछले कई साल से निरीक्षण भवन की मरम्मत और रख रखाव के लिए बजट नहीं मिल रहा है। इस कारण भवन की मरम्मत नहीं हो पा रही है। उन्होंने कहा बजट के अभाव में नलकूप बंद पड़े हैं।