बागपत। स्वास्थ्य विभाग की ओर से बृहस्पतिवार को धनौरा सिल्वर नगर में स्वास्थ्य कैंप लगाकर लोगों की जांच की। आशा व आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने घर-घर जाकर सर्वे किया। कैंप में 89 मरीजों की जांच की। जांच में 12 मरीज टाइफाइड के संदिग्ध मरीज मिले। उधर, गांव के ही युवक सोनू की टाइफाइड से मौत के मामले भी टीम ने जांच की, लेकिन परिजन कोई अभिलेख नहीं दिखा पाए।
सीएचसी अधीक्षक डॉ विभाष राजपूत ने बताया कि धनौरा सिल्वर नगर निवासी युवक सोनू पुत्र ऋषिपाल की मौत हो गई थी। परिजनों ने टाइफाइड से मौत होना बताया था। इसी को देखते हुए बृहस्पतिवार को चिकित्सकों की टीम, आशा और आंगनबाड़ी ने गांव में मृतक के घर जाकर टाइफाइड से मौत होने संबंधी चिकित्सकीय अभिलेख मांगे। मगर, परिवार के पास में कोई भी चिकित्सकीय अभिलेख नहीं मिला। परिजनों का कहना था कि मृतक को एक सप्ताह पहले टाइफाइड बुखार हुआ था। उसका इलाज गांव में ही कराया जा रहा था और 26 अक्तूबर को तबीयत बिगड़ने पर परिजनों ने उसे आस्था हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया, जहां से उसे मेरठ के लिए रेफर कर दिया गया। मेरठ जाते समय उसकी मौत हो गई। परिजनों के अनुसार उसकी मृत्यु आंतों का फटना बताया गया है। डेंगू पॉजिटिव होने की कोई रिपोर्ट टीम को नहीं मिली।
इसके बाद चिकित्सकों की टीम ने गांव शिविर लगाकर 89 मरीजों की जांच कर दवाइयां दी। शिविर में 45 मरीज सर्दी, जुकाम ,बुखार से पीड़ित मिले। सभी मरीजों की मलेरिया, डेंगू और टाइफाइड की जांच की गई। प्रारंभिक जांच में 12 मरीज टाइफाइड के संदिग्ध मिलें।