बड़ौत (बागपत)। कोताना में अवैध खनन की शिकायतों के बाद आखिरकार जांच शुरू हो गई है। एसडीएम अरविंद कुमार के आदेश पर लेखपालों की टीम ने पैमाइश की। सर्वे टीम का कहना है कि कोताना में अवैध खनन किया गया है, इसकी रिपोर्ट प्रशासन को भेज दी गई है। एसडीएम का कहना है कि मंगलवार को दोबारा पैमाइश कराई जाएगी। अगर यूपी के हिस्से में अवैध खनन की पुष्टि होती है तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।
कोताना और खेड़ी प्रधान गांव में अवैध रेत खनन किए जाने की शिकायतें प्रशासन से की। ग्रामीण शमशाद, दिलशाद और मोहम्मद रफी ने कहा पुलिस-प्रशासन की आंखों में धूल झोंककर कुछ लोग अवैध खनन कर रहे हैं। पॉकलेन यमुना में उतार दी । विरोध करने पर बंदूक दिखाई जाती है। अमर उजाला ने सोमवार के अंक में समाचार को प्रमुखता से प्रकाशित किया। खबर का असर यह हुआ कि एसडीएम अरविंद कुमार ने बड़ौत तहसील के लेखपाल और सर्वे लेखपाल को मौके पर भेजा। टीम को कोताना में अवैध खनन होने के सुबूत मिले हैं। लेखपाल राजेश कुमार शुक्ल ने कहा कि कोताना के हिस्से में खनन मिला है। कोताना के कुछ किसानों ने खनन के लिए अपनी जमीन दी है, इसकी पुष्टि भी हो चुकी है। रिपोर्ट तैयार कर प्रशासन को भेज दी। एसडीएम ने कहा रिपोर्ट अभी उन्हें नहीं मिली है। पैमाइश कराई जा रही है। यूपी में कोई पट्टा आवंटित नहीं है। अगर यूपी के हिस्से में खनन मिला तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।
कोताना के लोगों को डरा रहे बंदूकधारी
बड़ौत। शिकायत कर्ताओं का कहना था कि अगर ग्रामीण खनन का विरोध करते हैं तो आरोपी हथियारों के बल पर जान से मारने की धमकी देते हैं। माफिया लाखों रुपये के राजस्व की सरकार को चोट पहुंचा रहे हैं। पुलिस से भी बंदूकधारियों की शिकायत की गई है। ग्रामीणों का कहना है कि बंदूकों से डराने वालों की जांच होनी चाहिए। गौरतलब है कि गौरीपुर में ठेकेदार पक्ष और ग्रामीणों के बीच संघर्ष हो गया था।
अवैध खनन पर रालोद करेगा आंदोलन
बागपत। रालोद मंडल महासचिव ओमबीर ढाका ने कहा कि अवैध खनन आखिर कब तक चलेगा। इसी वजह से काठा जैसे बड़ा हादसा हो चुका और आए दिन बच्चे नदी में बने भंवर में डूबकर मर रहे। बागपत प्रशासन और सरकार चुप्पी साधे है। ठेकेदार पक्ष और किसानों के बीच घटनाएं हो चुकी है। खनन के कारण सभी सड़कें जर्जर हो गई है। जल्द रालोद इसके लिए आंदोलन चलाएगा। आबाद, राजवीर, अमित, योगेंद्र, सतीश, जितेंद्र मौजूद रहे।
कौन जिम्मेदार, यमुना में रेत के वाहनों को खींच रहे ट्रैक्टर
बागपत। हादसों से भी कोई सबक सीखने के लिए तैयार नहीं है। बहती यमुना के बीच रेत लदे वाहनों को जेसीबी से धकेला जा रहा है और ट्रैक्टर से खींचा जा रहा है। सवाल है कि अगर कोई हादसा हुआ तो जिम्मेदार कौन होगा।
गौरीपुर में खनन का पट्टा आवंटित है। यमुना के बीच से बनाया गया कच्चा रास्ता पानी में डूब चुका है, लेकिन इसी रास्ते से खनन का परिवहन जारी है। दिन में ही नहीं बल्कि रात में भी इसी रास्ते से वाहनों का परिवहन होता है। रेत लदे वाहनों को पीछे जेसीबी और आगे ट्रैक्टर लगाकर निकाला जा रहा है। हर वक्त हादसे का खतरा है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम जांच कर चुकी है। जिस तरह से खनन का परिवहन किया जा रहा है, उससे हादसों का खतरा बना हुआ है। यमुना में पानी आ जाने के बाद कुछ दिन वाहन गढ़ मिर्कपुर से निकाले, लेकिन ग्रामीणों के विरोध के चलते दोबारा से परिवहन यमुना के बीच से शुरू कर दिया गया है।
मौत से नहीं सीख रहे सबक
बागपत। यमुना के कुंड में डूबकर एक युवक की मौत हो चुकी है। इसके बावजूद लोग सबक सीखने के लिए तैयार नहीं है। दिनभर बुग्गियां यमुना से निकाली जाती रही। इसके अलावा बच्चे भी यमुना में नहाते रहे। बाइक और अन्य वाहनों को भी बुग्गियों पर लेकर यमुना के पार कर रहे हैं।