संवाद न्यूज एजेंसी
बागपत। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकान बनवाने में घोटाले की लगातार शिकायतें मिलने के बाद जिलाधिकारी शुक्रवार को डूडा कार्यालय पहुंचे और आवासों के संबंध में जानकारी की। उन्होंने विभिन्न विभागों के 60 अधिकारियों से एक-एक मकान की जांच कर रिपोर्ट सौंपने को कहा है। सबसे पहले बागपत शहर में बनाए गए मकानों की जांच होगी। इस जांच से डूडा के अधिकारियों पर कार्रवाई की तलवार लटक गई हैं।
अमर उजाला ने भी इस घोटाले को उजागर किया था। इसके बाद भाजपा जिलाध्यक्ष सूरजपाल गुर्जर ने सुबूत के साथ जिलाधिकारी को पत्र सौंपा था। इसके बाद जिलाधिकारी राजकमल यादव शुक्रवार को डूडा कार्यालय में छापा मारा और वहां फाइलों की जांच की जिलाधिकारी ने वहां पहले से बुलाए गए अधिकारियों को बागपत शहर के 25 वार्डों में बनवाए गए एक-एक मकान की जांच की जिम्मेदारी सौंपी है। जिलाधिकारी ने बताया कि मकानों की जांच के लिए छह नोडल अधिकारी बनाए है, जिनके साथ एक-एक सहायक अभियंता लगाया है। इनके अलावा करीब 48 अधिकारी लगाए गए हैं जो मकानों की जांच करके रिपोर्ट देंगे। जांच के दौरान देखा जाएगा कि जिसको लाभ दिया गया है, वह योजना का लाभ लेने के पात्र है या नहीं। मकान को नगर पालिका क्षेत्र के अंदर या बाहर बनाया गया है।
सरकारी नौकरी करने वालों और
जमींदारों के भी बनवा दिए मकान
डूडा के अधिकारियों ने शहरी प्रधानमंत्री आवास योजना में बड़ा घोटाला किया है। सरकारी नौकरी करने वालों के साथ ही जमींदारों के मकान भी बनवा दिए। अवैध कालोनियों व यमुना खादर में मकान बनवाए गए हैं। एक ही जगह पर लाभार्थी को दो-दो मकानों का लाभ दे दिया गया। कुछ मामले ऐसे भी है, जहां केवल दरवाजे लगवाकर पैसा जारी कर दिया गया।
डूडा से लाभ लेकर बनवाए गए
मकानों में बना दी तीन मंजिल
डूडा के अधिकारियों ने आंख बंद कर पीएम आवास का पैसा बांटा। पहले लोगों ने एक मंजिल बनाई और उसके बाद मकान को तीन मंजिला बना दिया। डूडा से मकान बनवाने के लिए केवल ढाई लाख रुपया मिलता है, ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि कैसे तीन-तीन मंजिल खड़ी कर दी। यदि वह मकान बनवाने में सक्षम थे तो प्रधानमंत्री आवास योजना के पात्र कैसे हो गए।
सब रजिस्ट्रार कार्यालय में खाली मिली अधिकारियों की कुर्सी
जिलाधिकारी राजकमल यादव ने डूडा कार्यालय के बाद सब रजिस्ट्रार कार्यालय का निरीक्षण किया। जहां शिकायत मिल रही थी कि सभी रजिस्ट्री पर रुपये लिए जा रहे हैं। जिलाधिकारी को देखकर रजिस्ट्री करने वाली जगह से सभी कर्मचारी खड़े होकर भाग गए और वहां मौजूद भीड़ में भगदड़ मच गई। जिलाधिकारी ने वहां रजिस्ट्री करने वालों की कुर्सियां खाली देखकर नाराजगी जताई और अधिकारी को फटकार लगाते हुए, वहां किसी न किसी कर्मचारी के जरूर मौजूद रहने की बात कही।