- सुल्तानपुर हटाना की महिला की नसबंदी में लापरवाही के कारण उपभोक्ता फोरम ने डॉ. सुषमा और डॉ. यशवीर पर लगाया जुर्माना
- नसबंदी के बाद भी महिला ने बच्ची को दिया था जन्म, दोनों पर कोई कार्रवाई नहीं करने का आरोप भी लगाया
संवाद न्यूज एजेंसी
बागपत। नसबंदी के बाद भी महिला के गर्भवती होने और बच्ची को जन्म देने के मामले में उपभोक्ता फोरम ने पूर्व सीएमओ और डिप्टी सीएमओ पर 5.10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। इन दोनों पर महिला की नसबंदी में लापरवाही और गर्भवती होने पर शिकायत करने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं करने का आरोप है। जुर्माना की राशि नहीं देने पर सात प्रतिशत वार्षिक ब्याज लगेगा।
सुल्तानपुर हटाना गांव के रहने वाले सुभाष ने पत्नी बबली की 20 मार्च 2017 को बागपत सीएचसी में नसबंदी कराई थी। उसके पहले ही चार बच्चे थे। इस पर उसने तत्कालीन सीएमओ डा. सुषमा चंद्रा और बागपत सीएचसी के प्रभारी चिकित्साधिकारी डा. यशवीर सिंह ने नसबंदी कराने की बात कही थी। नसबंदी कराने के बाद उसकी पत्नी को गर्भवती होने का शक हुआ। दिसंबर 2017 में अल्ट्रासाउंड कराया गया, जिसमें उसकी पत्नी आठ सप्ताह की गर्भवती मिली। वह शिकायत लेकर सीएमओ डा. सुषमा चंद्रा के पास पहुंचा, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। अगस्त 2018 में उसकी पत्नी ने सरूरपुर सीएचसी में बच्ची को जन्म दिया। वह मजदूरी करने के कारण पालन-पोषण नहीं कर सकता था, इसलिए उसने 15 लाख 25 हजार रुपये क्षतिपूर्ति के लिए उपभोक्ता फोरम में प्रार्थना पत्र दिया। सुनवाई करते हुए जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के अध्यक्ष रामकरन, सदस्य मीनाक्षी जैन व राजीव कुमार ने फैसला सुनाया और डा. सुषमा चंद्रा व डा. यशवीर सिंह पर पांच लाख दस हजार रुपये जुर्माना लगाते हुए एक महीने के अंदर पीड़ित को देने के आदेश दिए। एक महीने में रुपये नहीं दिए जाते है तो सात प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ रुपये देने होंगे।