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बेसहारा गोवंशीय पशुओं के मामले में अफसर गंभीर नहीं

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बड़ौत (बागपत)।
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प्रदेश सरकार के नुमाइंदे और प्रधान बेसहारा गोवंशीय पशुओं से निजात दिलाने के लिए कितने गंभीर हैं, इसका उदाहरण सोमवार को ब्लाक मुख्यालय पर देखने को मिला। शासन के निर्देश पर आयोजित बैठक मेें नाममात्र ही सरकारी अधिकारी और प्रधान मौके पर पहुंचे।
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उल्लेखनीय है कि जनपद का एक भी गांव ऐसा नहीं है, जहां पर आवारा पशुओं का आतंक न हो। सरकारी स्कूलों सहित अन्य सरकारी भवनों में ग्रामीणों द्वारा बेसहारा गोवंशीय पशुओं को बंध कर प्रदेश सरकार व प्रशासन से निजात दिलाने की मांग उठाई जा रही है। कई जगहों पर अभी भी बेसहरारा पशुओं से निजात दिलाने को लेकर हंगामा-प्रदर्शन जारी है। ग्रामीणों की समस्या को देखकर सरकार ने प्रशासनिक अधिकारियों को बैठक कर ग्रामीणों को बेसहारा पशुओं से निजात दिलाने के निर्देश दिए हैं, लेकिन प्रधानों सहित सचिवों व अन्य विभागों के लिए प्रदेश सरकार के आदेशों का कोई मान्य नहीं है। सोमवार को ब्लाक स्तर पर आयोजित बैठक में नाम मात्र ही सरकारी अधिकारी और कर्मचारी पहुंचे। दो-चार प्रधान व एक-दो सचिव। किसी ने भी बैठक में आने की रुचि नहीं दिखाई। बीडीओ प्रेमचंद ने बताया कि जिन लोग बैठक में नहीं आए, उनसे कारण बताओ नोटिस जारी किया जाएगा। इसमें एसडीओ कृषि तेजपाल चौहान, पशु चिकित्साधिकारी डॉ. खुशीराम, डॉ. केके गुप्ता, डॉ. हयात, डॉ. अमित कुमार, डॉ. रोहित, डॉ. राजीव, अंजन पाल, संजीव, योगेंद्र, विकास, सुरेंद्र, कीर्ति पाल, देवेंद्र, सुरेंद्र, कीरत पाल, रामवीर, विनोद, अमित, राजेंद्र, कुलदीप आदि रहे।
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