सुदामा चरित्र और रूकमणी विवाह का सुनाया प्रसंग
बागपत। शहर के जानकीदास मंदिर में चल रही श्रीमद् भागवत कथा का शुक्रवार को समापन हो गया। कथा वाचक बाल साध्वी राधा देवी सुदामा चरित्र और रूकमणी विवाह का प्रसंग सुनाया। कहा कि सुदामा के जीवन में भगवान जिस दिन आए, उसी दिन से भगवान श्रीकृष्ण को अपना मित्र बना लिया और संकल्प लिया कि जीवन भर क्या जन्मो जन्म में इन को नहीं छोड़ने वाला हूं। सुदामा बहुत विपत्तियां आई घर में खाने के लिए एक दाना तक नहीं रहा, भूखे और प्यासे रहे परंतु कभी परमात्मा के नाम को नहीं छोड़ा। उन्होंने प्रतिज्ञा की थी कि जीवन में चाहे कितनी भी विपत्तियां मेरे ऊपर क्यों ना आए परंतु मैं भगवान से कुछ नहीं मांगूगा। विपत्तियां आने पर केवल कृष्णा-कृष्णा ही जपते रहे। भगवान ने सुदामा को वह सब कुछ दिया जो कभी किसी को नहीं मिला। वह जान भी नहीं पाए झोंपड़ी पर महल कब बन गया है। भगवान की महिमा सुनकर रूकमणी ने प्रतिज्ञा कर ली कि श्रीकृष्ण से ही शादी करूंगी। राजा परीक्षित के पूछने पर सुखदेव मुनि ने अनेक प्रसंगों को सुनाकर मोह दूर किया। आचार्य राजकुमार शास्त्री, राजू, राज्यपाल, प्रेमदास, लालदास, सुरेश गुर्जर मौजूद रहे।
हवन के साथ अखंड रामायण पाठ का समापन
अग्रवाल मंडी टटीरी। श्री राधा कृष्ण ठाकुर द्वारा मंदिर में चल रही रामायण के तीन दिवसीय अखंड पाठ का शुक्रवार को हवन के साथ समापन हो गया। श्रद्धालुओं ने आहुतियां दी। यज्ञ के यज्ञमान मनोज गुप्ता सहपत्नी करहे। पंडित आचार्य विनोद कुमार, मृदुल मित्तल, न रेंद्र, हरीकिशन, प्रमोद, रामनिवास, दीपक गोयल, विनोद सीासद, मुकेश, महेंद्र प्रसाद, संजीव शर्मा, अंकुर शर्मा मौजूद रहे।