बागपत। दिल्ली और एनसीआर में हवा की सेहत में सुधार नहीं है। बागपत में वायु प्रदूषण खतरनाक स्तर पर है। एक्यूआई 465 के स्तर पर पहुंच गया। अभी दो दिन तक इसी तरह के हालात बने रहने की संभावना जताई जा रही है। वायु प्रदूषण का यही हाल रहा तो लोगों की सेहत खराब होगी। डॉक्टर कहते हैं कि फेफड़ों, दिल और दिमाग पर भी हवा की खराब गुणवत्ता का असर पड़ सकता है।
धमधड़ाके के त्योहार दीवाली के छह दिन बीत जाने के बावजूद हवा की गुणवत्ता में सोमवार को भी सुधार होता नहीं दिखा। सुबह के समय स्मॉग की चादर बिछ गई। न्यूनतम तापमान में गिरावट दर्ज होने से ठंड का असर भी रहा। दोपहर के समय धूप खिली। इसके बाद शाम पांच बजे के बाद से ही फिर से स्मॉग की चादर बिछनी शुरू हो गई । केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से जिला अस्पताल के गेट पर लगाए गए सर्वर पर गुणवत्ता सूचकांक जारी किया। यहां बागपत का पीएम 2.5 का एक्यूआई 465 तक दर्शाया है। यहां वायु प्रदूषण खतरनाक स्तर पर पहुंच गया। डॉक्टरों का कहना है कि इस तरह की हवा में सांस लेने से बीमारी बढ़ सकती है।
अस्थमा, टीबी और सांस के मरीज परेशान
बागपत। वायु सूचकांक के 465 के स्तर पर पहुंच जाने से सांस की बीमारियों वाले मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अस्थमा, टीबी और सांस के रोगी परेशान होने लगे हैं। इस तरह के मरीज घरों में ही रहने को मजबूर हैं। सुबह शाम के वक्त इस तरह की हवा इन रोगियों के लिए बीमारी को बढ़ा सकती है।
तेज हवा या बारिश से मिल सकेगी राहत
बागपत। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि हवा की रफ्तार अभी सिर्फ तीन किमी प्रति घंटा ही है। रफ्तार बढ़ने से स्मॉग की चादर हटेगी या फिर बारिश से हवा में तैर रहे धूल के कण दब सकेंगे। जिससे प्रदूषण का स्तर कम होगा।
क्या है वायु प्रदूषण की वजह
बागपत। हवा की सेहत खराब होने की कई वजह सामने आई हैं। बागपत हरियाणा से सटा हुआ है। हरियाणा में धान की खेती अधिक होती है। वर्तमान समय में धान की कटाई के बाद पराली जलाई जा रही है। इसके अलावा यह पराली यूपी में भी ट्रैक्टरों के माध्यम से आ रही है। मौसत में आर्द्रता अधिक है, जिस कारण धूल के कण भी हवा में घूम रहे हैं। दीपावली पर छोड़े गए पटाखे भी वजह हैं। डीजल वाहन भी एक कारण हैं। कूड़ा जलाया जाने के कारण भी हवा की सेहत खराब हो गई है। बागपत जनपद में करीब 550 ईंट भट्ठे हैं, इनमें सैकड़ों का संचालन अभी भी हो रहा है। फैक्टरी, निर्माण कार्य और खराब सड़कों की वजह से उड़ रही धूल भी वायु प्रदूषण को फैला रही है।